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कामयाबी चाहिए तो शिक्षा से नाता जोड़ो : डॉ. आजम बेग

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  एमएसआई कॉलेज में वार्षिक जलसा-ए-सीरतुन्नबी का समापन गोरखपुर। किसी भी काम को सफलतापूर्वक करने के लिए मेहनत, ईमानदारी, लगन और दृढ़ निश्चय का होना बहुत जरूरी होता है। गलतियों से सीख लेकर आगे बढ़ना ही समझदार व्यक्ति की पहचान होती है, लेकिन जो लोग ऐसा नहीं करते हैं, वे हमेशा सफल होने से चूक जाते हैं। इसलिए कामयाबी चाहिए तो मेहनत व लगन के साथ साथ शिक्षा से भी नाता जोड़ना होगा। यह बातें राजस्थान के डॉ. मो. आजम बेग (पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी) ने कही। डॉ. आजम रविवार को एमएसआई (मियां साहब इस्लामिया) इंटर कॉलेज में आयोजित चार दिवसीय जलसा-ए-सीरतुन्नबी के समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने पैग़ंबरे इस्लाम की ज़िन्दगी पर रोशनी डालते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं जीवन के हर पहलू में सभी कर्तव्यों का पालन किया और अपने साथियों और सभी मुसलमानों को इसका पालन करने का निर्देश दिया, क्योंकि सामाजिक अशांति को रोकने का एकमात्र रास्ता कर्तव्यों का पालन है। अगर हर व्यक्ति सही तरह से अपना कर्त्तव्य निभाने लगे, तो दुनिया में शांति और सद्भाव कायम हो सकता है। उन्हो...

हाफिजे मिल्लत का मनाया उर्स, बच्चे पुरस्कृत

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  गोरखपुर। तुर्कमानपुर स्थित मकतब इस्लामियात में बुधवार को दीनी तालीम के लिए एशिया में अलग पहचान रखने वाली अरबी यूनिवर्सिटी अल जामियतुल अशरफिया मुबारकपुर के संस्थापक हाफिजे मिल्लत हज़रत शाह अब्दुल अज़ीज़ अलैहिर्रहमा का 50वां उर्स-ए-पाक अदब ओ एहतराम के साथ मनाया गया। बच्चों ने किरात, तकरीर, नात व मनकबत पेश‌ की। अतिथियों ने बच्चों को पुरस्कृत किया।  उलमा किराम ने हाफिजे मिल्लत की दीनी व दुनियावी ख़िदमात पर रोशनी डाली। अध्यक्षता करते हुए मुफ्ती-ए-शहर अख़्तर हुसैन मन्नानी ने कहा कि हाफिजे मिल्लत पूरे तौर पर शरीअत के आमिल थे। लोगों को शरीअत समझाने वाले थे और अमल कराने वाले भी थे। अपनी पूरी ज़िंदगी अल्लाह, रसूल और इंसानों की सेवा में गुजार कर दीन और दुनिया दोनों में अपना नाम रोशन कर लिया। आपका पैगाम था कि "ज़मीन के ऊपर काम, ज़मीन के नीचे आराम" यानी जब तक इंसान ज़िंदा रहे दीन-ए-इस्लाम, मुल्क व इंसानियत की सेवा कर नेक अमल करता रहे ताकि मौत के बाद कब्र में चैन व सुकून हासिल हो सके। नायब काजी मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि हाफिजे मिल्लत ने कौम की दीनी और दुनियावी रहनुमाई की। मदरसा...

एमएसआई इंटर कॉलेज का चार दिवसीय वार्षिक जलसा आज से

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  प्रदेश भर के मकतब-मदरसा व स्कूल-कॉलेज के छात्रों के बीच होगा मुकाबला - दीनी तालीमी नुमाइश होगी आकर्षण का केंद्र गोरखपुर। एमएसआई (मियां साहब इस्लामिया) इंटर कॉलेज बक्शीपुर के परिसर में 28, 29, 30 नवंबर व एक दिसंबर को कालेज का सालाना जलसा-ए-सीरतुन्नबी आयोजित किया जाएगा। इस दौरान दीनी तालीमी नुमाइश (धार्मिक शिक्षा प्रदर्शनी) भी लगाई जाएगी। जलसे में प्रदेश स्तर के स्कूल-कॉलेज, मकतब-मदरसा एवं, स्थानीय प्राइमरी स्कूल के छात्रों के बीच किरात, नात, भाषण (तकरीर), पेंटिंग, वाद-विवाद, साइंस क्विज़, इस्लामी क्विज के मुकाबले होंगे। कॉलेज के प्रबंधक महबूब सईद हारिस, प्रधानाचार्य मो. नदीमुल्लाह अब्बासी एवं जलसे के संयोजक रिजवानुल हक ने बताया कि मऊ, आजमगढ़, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ, अलीगढ़, लखनऊ, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, महराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, बाराबंकी समेत बीस से ज्यादा जिलों के छात्र प्रतिभाग करेंगे। उन्होंने बताया कि 28 नवंबर को शाम 5:30 बजे जलसा-ए-सीरतुन्नबी व दीनी तालीमी नुमाइश का उद्घाटन नायब काजी मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी करेंगे। 29 नवंबर को सान्वी व जूनियर ग्रुप का मु...

शहज़ादी ए रसूल हज़रत ज़ैनब रदियल्लाहु तआला अन्हा

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  मुफ्तिया कहकशां फातिमा  तुर्कमानपुर, गोरखपुर। हज़रत ज़ैनब रदियल्लाहु तआला अन्हा अल्लाह पाक के आखरी नबी हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिहि वसल्लम की साहिबज़ादियों में सबसे बड़ी और नबी ए रहमत सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिहि वसल्लम की पहली औलाद हैं। आपकी पैदाइश ऐलाने नुबुव्वत से 10 साल पहले जब पैग़ंबरे आज़म हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिहि वसल्लम की ज़ाहिरी उम्र शरीफ 30 साल थी मक्का मुकर्रमा में उम्मुल मोमिनीन हज़रत खदीजा रदियल्लाहु तआला अन्हा के शिकम से हुई।  नबी ए पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिहि वसल्लम आपकी विलादत पर बहुत खुश हुए। अरब वाले अपने बच्चों की शुरुआती परवरिश देहात की खुली हवाओं में कराते। लिहाज़ा इसी दस्तूर के मुताबिक शुरू में आपको एक नेक सीरत खातून के हवाले कर दिया गया। दो साल की मुद्दत पूरी हुई तो आप दोबारा अपनी मां के देखभाल में आईं और नेक मां बाप के साए में पाक तालीम व तरबियत हासिल की।  उम्मुल मोमिनीन हज़रत खदीजा रदियल्लाहु तआला अन्हा की गुज़ारिश पर अल्लाह पाक के आखरी नबी सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिहि वसल्लम ने हज़रत ज़ैनब रदियल्ला...

आखरी नबी की पाक साहबज़ादी हज़रते रुक़य्या रदियल्लाहु तआला अन्हा

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  मुफ्तिया कहकशां फातिमा  तुर्कमानपुर, गोरखपुर। हज़रते रुक़य्या रदियल्लाहु तआला अन्हा अल्लाह पाक के आखरी नबी सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिहि वसल्लम की दूसरी बेटी हैं। आपकी वालिदा उम्मुल मोमिनीन हज़रत खदीजा तुल कुबरा रदियल्लाहु तआला अन्हा हैं। आप ऐलाने नुबुव्वत से 7 बरस पहले पैदा हुईं। और इस्लाम के शुरुआती दौर ही में अपनी वालिदा के साथ इस्लाम ले आईं। इस्लाम से पहले नबी पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिहि वसल्लम की दो पाक बेटियां हज़रते रुक़य्या और हज़रते उम्मे कुलसूम रदियल्लाहु तआला अन्हुमा का निकाह अबू लहब के दोनों बेटे उत्बा और उतैबा से हुआ था। लेकिन अभी इनकी रुख़्सती नहीं हुई थी। अबू लहब और मक्का की दीगर इस्लाम दुश्मन ताकतें इस्लाम और पैगंबर ए इस्लाम के लिए शिद्दत पकड़ गईं। वह अख्लाकी हदों और इंसानी उसूलों को भूल कर अल्लाह पाक के आखरी नबी सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिहि वसल्लम की शान में बुरे अल्फ़ाज़ इस्तेमाल किए। इसी सिलसिले में अल्लाह पाक की तरफ से कुरआन पाक की सूरत सूरह-ए-लहब नाज़िल हुई। अबू लहब कुरआन में अपनी इस रुसवाई का बयान सुनकर गुस्सा में आग बबूला हो गया। इंसानी उसूलों क...

मुकद्दस हज यात्रा 2025 : दूसरी किस्त की राशि 16 दिसंबर तक करें जमा

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  गोरखपुर। मुकद्दस हज यात्रा 2025 के लिए हज कमेटी ऑफ इंडिया ने दूसरी किस्त की राशि जमा करने की तिथि जारी कर दी है। दूसरी किस्त के तहत हज यात्रा पर जा रहे प्रति व्यक्ति को एक लाख 42 हजार रुपये जमा कराना है। राशि जमा करने की अंतिम तिथि 16 दिसंबर निर्धारित है। गोरखपुर से करीब 134 लोग मुक़द्दस हज यात्रा करेंगे। जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पहली किस्त की राशि की तरह ही इस बार भी राशि उसी प्रक्रिया से जमा होगी। साथ ही हज कमेटी ऑफ इंडिया ने मेहरम श्रेणी की महिलाओं के लिए भी ऑनलाइन हज आवेदन करने की घोषणा की है। मेहरम श्रेणी में केवल वे महिलाएं ही हज आवेदन की पात्र होंगी, जो पासपोर्ट न मिलने या अन्य कारणों से समय पर हज आवेदन नहीं कर सकीं थीं। जिनके शरिया मेहरम ने पहले ही हज के लिए ऑनलाइन आवेदन कर दिया है, पहली किस्त की राशि भी जमा कर दी है और उनका कवर पांच व्यक्तियों से कम हो। मेहरम श्रेणी के लिए पूरे भारत में 500 कोटा आवंटित किया गया है। अंतिम चयन ड्रॉ के बाद किया जायेगा। मिली जानकारी के अनुसार मेहरम श्रेणी की महिलाएं जिनके पास नौ दिसंबर 2024 या उससे पहले का पासपो...

हज़रते सैयदा बीबी आमिना रदियल्लाहु तआला अन्हा

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  पैग़ंबरे आज़म हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिहि वसल्लम का नसब शरीफ़ वालिद माजिद हज़रत सैयदना अब्दुल्लाह रदियल्लाहु तआला अन्हु की तरफ से यह है - हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम बिन अब्दुल्लाह बिन अब्दुल मुत्तलिब बिन हाशिम बिन अब्दे मुनाफ़ बिन कुस्सा बिन कलाब बिन मुर्रह बिन कअब बिन लुवइ बिन गालिब बिन फेहर बिन मालिक बिन नज़र बिन किनाना बिन खुजैमा बिन मुदरिका बिन इल्यास बिन मुज़र बिन नज़ार बिन मअद्द बिन अदनान और वालिदा माजिदा हज़रते सैयदा बीबी अमिना रदियल्लाहु तआला अन्हा की तरफ से पैग़ंबरे आज़म हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिहि वसल्लम का शजरा-ए-नसब यह है - हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम बिन आमिना बिन्ते वहब बिन अब्दे मुनाफ़ बिन जुहरा बिन किलाब बिन मुर्रह। पैग़ंबरे आज़म हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिहि वसल्लम का खानदान व नसब, नजाबतो-शराफत में तमाम दुनिया के खानदानों से अशरफ़ व आला है। पैग़ंबरे आज़म हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिहि वसल्लम के मां-बाप दोनों का सिलसिला-ए-नसब 'फिहर बिन मालिक' से मिलता है। इसलिए पैग़ंबरे आज़म हज़रत मुहम्मद सल्लल्ला...