मदरसा शिक्षकों व छात्रों की मौजूदगी सियासी चर्चा का विषय बन गई


भाजपा के सियासी शक्ति प्रदर्शन में सरकारी मदरसे के छात्र-शिक्षक हुए शामिल, योगी को फिर सीएम बनाने का लिया संकल्प

नगर निगम पार्क से रैली की शक्ल में सभा स्थल पहुंचे मदरसा शिक्षक और छात्र, हाथों में थीं मोदी के समर्थन वाली तख्तियां

गोरखपुर। बुधवार को महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज में भाजपा की ओर से आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा में मुस्लिम समाज, सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों के शिक्षकों और छात्रों की भागीदारी चर्चा का विषय रही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में आयोजित इस राजनीतिक कार्यक्रम में मदरसा शिक्षकों और छात्रों की अच्छी-खासी तादाद नजर आई। नगर निगम पार्क में एकत्र हुए शिक्षक और छात्र रैली की शक्ल में सभा स्थल तक पहुंचे। उनके हाथों में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की ओर से जारी तख्तियां थीं, जिन पर ‘मोदी कहीं नहीं जाएंगे, मोदी हैं, मोदी ही रहेंगे’ और ‘न दूरी है, न खाई है, मोदी हमारा भाई है’ जैसे नारे लिखे थे। तख्तियों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी की तस्वीरें भी लगी थीं।

पदयात्रा में शामिल मदरसा जियाउल उलूम पुराना गोरखपुर गोरखनाथ के शिक्षक मोहम्मद शाह आलम ने बताया कि उनका मदरसा, गोरखनाथ मंदिर के बगल में है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनके पड़ोसी हैं। हम लोग उनके स्वागत के लिए पहले भी वहां जाते रहे हैं और इस कार्यक्रम में भी इसी उद्देश्य से पहुंचे हैं। शाह आलम ने कहा कि वे चाहते हैं कि 2027 में योगी आदित्यनाथ दोबारा मुख्यमंत्री बनें। इसके लिए जहां तक संभव होगा, लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करेंगे और उन्हें जिताने का प्रयास करेंगे।

वहीं, सफीउर्रहमान ने कहा कि पदयात्रा का संदेश ‘सबका साथ, सबका विकास’ है और मुस्लिम समुदाय के लोग भी इसमें साथ खड़े हैं। उनका दावा था कि मुसलमान अब उन लोगों से दूर हो चुके हैं, जिन्होंने उन्हें तबाह और बर्बाद किया। उन्होंने प्रदेश में दंगा और गुंडागर्दी खत्म होने तथा विकास होने की बात कहते हुए कहा कि मुसलमान आगे भी योगी सरकार के साथ रहेंगे।

कार्यक्रम में मौलाना रियाजुद्दीन कादरी, कारी अनीस, मौलाना इदरीस, मौलाना नूरुज्जमा मिस्बाही, कारी नुरुल हुदा, मुफ्ती अख्तर हुसैन मन्नानी, कारी नसीमुल्लाह, जावेद अख्तर, कारी अबुजर नियाजी, मौलाना इश्तियाक अहमद, मुबारक हुसैन, मौलाना मसरूफ अहमद, हाफिज कासिम, कारी शमशीर अहमद, हाफिज बरकतुल्लाह, मुदीर अहमद, अली अहमद, के सैयद मुहम्मद राशिद, अली हुसैन अंसारी सहित मदरसा दारूल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार, मदरसा मेराजुल उलूम चिलमापुर, मदरसा अंजुमन इस्लामिया खूनीपुर, मदरसा जियाउल उलूम पुराना गोरखपुर गोरखनाथ आदि मदरसों के शिक्षक, छात्र व अन्य लोग शामिल हुए।

मदरसा शिक्षकों व छात्रों की मौजूदगी सियासी चर्चा का विषय बन गई

भाजपा की ओर से आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा में इस बार मदरसा शिक्षकों व छात्रों की मौजूदगी भी सियासी चर्चा का विषय बन गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में आयोजित इस राजनीतिक कार्यक्रम में सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों के शिक्षक और छात्र भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। नगर निगम पार्क में एकत्र हुए मदरसा शिक्षक और छात्र रैली की शक्ल में सभा स्थल तक पहुंचे। उनके हाथों में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की तख्तियां थीं, जिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ ‘मोदी कहीं नहीं जाएंगे, मोदी हैं, मोदी ही रहेंगे’ और ‘न दूरी है, न खाई है, मोदी हमारा भाई है’ जैसे नारे लिखे थे। तख्तियों पर प्रदेश सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी की तस्वीर भी नजर आई।

खास बात यह रही कि जिस कार्यक्रम का आयोजन भाजपा ने अपने राजनीतिक अभियान के तहत किया था, उसमें सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों के छात्र और शिक्षक भी भागीदारी करते दिखाई दिए। इससे यह सवाल उठने लगा कि आखिर शैक्षणिक संस्थानों और उनमें पढ़ने वाले बच्चों को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? मदरसों में शिक्षा हासिल करने वाले बच्चों की पहचान एक विद्यार्थी के रूप में होनी चाहिए या फिर उन्हें राजनीतिक नारों और चुनावी संदेशों वाली तख्तियां थमाकर सियासी कार्यक्रमों तक पहुंचाना उचित है?

हालांकि, कार्यक्रम में शामिल कई छात्र और शिक्षक कैमरे के सामने खुलकर बोलने से बचते नजर आए। कुछ ने तो कैमरे के सामने अपना चेहरा भी ढक लिया। ऐसे में उनकी भागीदारी के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर भी सवाल बने रहे।

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