फैजाने रमज़ान : दो रमज़ान के दरमियान के गुनाह माफ़

रोजेदार को एक घूंट पानी पिलाने से सारे गुनाह माफ

गोरखपुर। हाफ़िज़ रहमत अली निजामी ने बताया कि पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम ने फरमाया कि जो कोई रमजानुल मुबारक में रोजादार को पानी पिलाए तो वो अपने गुनाहों से इस तरह पाक व साफ हो जाएगा गोया अभी अपनी मां के पेट से पैदा हुआ हो। सहाबा ने अर्ज किया या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ये हुक्म घर पर है या सफर में या उस जगह जहां पानी न मिलता हो ? पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम ने फरमाया कि यह हुक्म आम है अगरचे फुरात नदी के किनारे पर भी पानी पिला दे।
अल्लाह का अपने बंदों पर किस कद्र एहसान है कि पानी जैसी अजीम नेअ़मत हमें बिल्कुल मुफ्त दी और दूसरों को पिलाने पर हमें बे हद सवाब भी अता फरमाया है। हदीस में है जिसने मुसलमान को वहाॅं पानी का घूंट पिलाया जहाॅं पानी मिलता है तो गोया गरदन यानी गुलाम को आजाद किया और जिसने मुसलमान को ऐसी जगह पानी पिलाया जहाॅं पानी नहीं मिलता तो गोया उसे जिन्दा कर दिया और माहे रमजान में अपने रोजादार भाई को पानी पिलाने वाले के तो सारे गुनाह ही मुआ़़फ़ फरमा दिए जाते हैं। रोजादार किस तरह खुश नसीब है कि चाहे जाग रहा हो या सो रहा हो हर वक्त ही वो इबादत में है गोया उस का हर हर सांस अल्लाह की इबादत में गुजर रहा हैं उस खुश नसीब के लिए एक हदीस में मुताबिक सुबह व शाम सत्तर सत्तर हजार फिरिश्ते मगफिरत की दुआ माॅंगते रहते है उसका बिस्तर, लिबास, उसकी नअलैन आदि उस की दुआएं देती है।

  • आग की पूजा करने वाले पर अल्लाह की रहमत

कारी मुहम्मद अनस ने बताया कि रमजान का माह सभी के लिए रहमतों से मामूर हेै। मुसलमान तो मुसलमान दूसरे धर्मों के लोग भी इससे फैजयाब होते हैं। इसकी कद्र करने वाला कोई भी हो अल्लाह की रहमत उस पर जरूर नाजिल होती है। नुजहतुल मजालिस में है कि शहर बुखारा में एक मजूसी (आग पूजने वाला) रहता था। एक मरतबा रमजान शरीफ में वो अपने बेटे के साथ मुसलमान के बाजार से गुजर रहा था। उसके बेटे ने कोई चीज एअ़लानिया तौर पर खानी शुरू कर दी। मजूसी ने जब ये देखा तो अपने बेटे को एक तमांचा रसीद कर दिया और खूब डाॅंटकर कहाॅं, तुझे रमजानुल मुबारक के महीने में मुसलमानों के बाजार में खाते हुए शर्म नहीं आती? लड़के ने जवाब दिया पिताजी! आप भी तो रमजान शरीफ में खाते है। बाप ने कहा , ठीक है मैं भी खाता हूॅं। मगर छुपकर अपने घर में खाता हॅूं। मुसलमानों के सामने नहीं खाता। और इस माहे मुबारक की बेहुरमती नहीं करता। कुछ अर्से के बाद उस शख्स की मृत्यु हो गई। किसी ने ख्वाब में उसको जन्नत में टहलते हुए देखा तो उसे बड़ा ताज्जुब हुआ, पूछा तू तो मजुसी था। जन्नत में कैसे आ गया? कहने लगा वाकई मैं मजूसी था। लेकिन जब मौत का वक्त करीब आया तो अल्लाह ने एहतरामे रमजान की बरकत से मुझे ईमान की दौलत से और मरने के बाद जन्नत से सरफराज फरमाया।

कारी मुहम्मद अनस ने किताबों के हवाले से बताया कि 
तंबीहुल गाफिलीन में हजरत अअ़मश ,हजरते खैसमा सहाबी से नकल करते हैं एक रमजान दूसरे रमजान तक, एक हज दूसरे हज तक, और एक जुमा दूसरे जुमा तक, एक नमाज दूसरे नमाज तक के गुनाहों का कफ्फारा बनते हैं। जबकि कबीरा गुनाहों से बचता रहे। दुर्रतुन नासिहीन में हजरते अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास से मरवी है कि पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि जब रमजान शरीफ की पहली तारीख होती है तो अर्शे अजीम के नीचे से मसीरा नामी हवा चलती है जो जन्नत के दरख्तों के पत्तों को हिलाती है। इस हवा के चलने से ऐसी दिलकश आवाज़ बुलन्द होती है कि इस हवा  के चलने से ऐसी दिलकश आवाज़ बुलन्द होती है  कि इस से बेहतर आवाज़ आज तक किसी ने नहीं सुनी। हूरें अल्लाह की बारगाह में अर्ज करती हैं, या अल्लाह  अपने बंदों में से हमारे लिए शौहर मुकर्रर फरमा। पस रमजान के रोजादारों में से कोई ऐसा न होगा। जिसको उन हूरों में से एक हूर न मिले। उन हूरों के वास्ते सुर्ख याकूत से बना हुआ एक तख्त है, हर तख्त पर सत्तर फर्श हैं और सत्तर नेअमत के ख्वान मुख्तलिफ किस्म के खानों से भरे हुए हैं। ये सब नेअमतें रोजादारों के लिए होंगी और ये उन नेकियों के इलावा होंगी जो रोजादार ने रमजान शरीफ में की।

  • बिछौना दुआएं देता है 

मौलाना महमूद रजा कादरी ने किताबों के हवाले से बताया कि हदीस में है कि पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि मोमिन माहे रमजान में बेदार होता है और लेटे करवटे बदलता है, और अल्लाह के जिक्र में लगा रहता है । तो उससे फिरिश्ता कहता है उठ! अल्लाह  तुझ पर रहम करे। फिर जब वो उठकर खड़ा होता है तो उसका बिछौना उसके लिए दुआ करता है ऐ अल्लाह इसको जन्नत के बेहतरीन बिछौना अता फरमा। और जब वो जूते पहनता है तो वो जूते उसके लिए दुआ करते हैं, ऐ अल्लाह ! इसको पुलसिरात पर साबित कदम रखना। और जब बर्तन लेता है तो बर्तन उसके लिए दुआ करता है, ऐ अल्लाह इसको जन्नत के बरतन अता फरमा। और जब वुजू करता है तो पानी उसके लिए दुआ करता है। ऐ अल्लाह! इसको गुनाहों और खताओं से पाक व साफ कर दे और अगर अल्लाह के सामने खड़ा होता है यानि नमाज पढ़ने लगता है तो उसके लिए काबा शरीफ दुआ करता है, ऐ अल्लाह! इसकी कब्र को मुनव्वर और कुशादा कर दे और अल्लाह उसकी तरफ नजर करता है और फरमाता है ऐ मेरे बंदे! तू जो कुछ दुआ माॅंगेगा मैं कुबूल फरमाऊंगा।
माहे रमजान के कद्रदानों और माहे रमजान में रोजा रखकर उसकी रहमत भरी मुबारक साअ़तों से फैज उठाने वालों! आपको मुबारक हो कि एक तो रोजे के दौरान ख्वाह आप जाग रहे हों या सो रहे हों हर हर लम्हा आपका इबादत में गुजर रहा है तो दूसरी तरफ आपको आपका लिबास और बर्तन वगैरह दुआएं दे रहे हैं। बल्कि करम बालाए करम तो ये है कि खुद खालिके काएनात की रहमत जोश पर है और फरमाया जा रहा है कि बंदे तेरा काम है माॅंगे जाना और हमारा काम है दिए जाना।

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