उमराह से लौटे सैयद नदीम और खुर्शीद आलम का रेलवे स्टेशन पर फूल-मालाओं से स्वागत, दुबई में छूटी फ्लाइट
गोरखपुर। उमराह की अदायगी के बाद वतन वापसी की राह देख रहे सूरजकुंड कॉलोनी निवासी सैयद नदीम अहमद और मुहम्मद खुर्शीद आलम अपनी-अपनी पत्नियों के साथ बुधवार सुबह गोरखपुर पहुंच गए। हमसफर ट्रेन से रेलवे स्टेशन पहुंचने पर परिजनों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया। लंबे इंतजार के बाद अपनों को सामने देखकर परिवार के लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। खासकर छोटे-छोटे बच्चों से मुलाकात के बाद सैयद नदीम अहमद भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि उमराह के दौरान मदीना में सब कुछ ठीक था, लेकिन वतन वापसी का सफर काफी मुश्किलों भरा रहा। एक नवंबर को शुरू हुआ सफर पूरा करने में उन्हें तीन रातें जागकर बितानी पड़ीं।
सैयद नदीम अहमद ने बताया कि उनकी वापसी 21 अक्टूबर को निर्धारित थी, लेकिन पश्चिम एशिया के हालात और उड़ानों में व्यवधान के चलते उन्हें सऊदी अरब में अतिरिक्त समय तक रुकना पड़ा। एक नवंबर को मदीना से जेद्दा और फिर अबू धाबी होते हुए आगे का सफर शुरू किया। इस दौरान सबसे ज्यादा परेशानी दुबई में हुई। वहां फ्लाइट बदलने के दौरान काफी मशक्कत करनी पड़ी और उनकी एक कनेक्टिंग फ्लाइट भी छूट गई। बाद में दूसरी फ्लाइट से भारत के लिए रवाना हुए। इस दौरान लगातार सफर और उड़ानों के इंतजार के कारण तीन रातें जागकर गुजारनी पड़ीं।
उन्होंने बताया कि सफर के दौरान आबे जमजम (जमजम का पानी) ले जाने को लेकर भी परेशानी हुई। दुबई में इसे आगे ले जाने से रोक दिया गया। एक बोतल के लिए 1500 रुपये शुल्क मांगा गया। ऐसे में उन्होंने दो बोतल वहीं छोड़ दीं और दो बोतल अपने साथ लेकर आए।
नदीम अहमद के मुताबिक, वापसी के लिए अतिरिक्त खर्च करने पड़े, जिसकी व्यवस्था परिजनों ने की। मुश्किल समय में भारतीय दूतावास से भी मदद मांगी गई थी, लेकिन उन्हें कोई सहायता नहीं मिल सकी।
सैयद नदीम ने मीडिया का विशेष रूप से आभार जताया। उन्होंने कहा कि भले ही उन्हें कहीं से आर्थिक या अन्य मदद नहीं मिली, लेकिन मीडिया ने उनकी परेशानियों को प्रमुखता से प्रकाशित कर आम लोगों तक पहुंचाया। इससे विदेश में मुश्किल हालात के बीच उनकी आवाज अवाम तक पहुंची।
घर पहुंचने के बाद बच्चों से मुलाकात के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि इतने दिनों बाद अपने बच्चों को सामने देखकर बेहद खुशी हुई। वापसी का सफर कितना भी मुश्किल रहा हो, परिवार के बीच लौटने की खुशी ने सारी परेशानियां भुला दीं।



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