गोरखपुर।मदरसा दारूल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार के मुफ्ती मौलान अख्तर हुसैन ने मस्जिद गाजी रौजा में जिक्रे शुहदाए कर्बला के समापन अवसर पर कहा कि कर्बला की दोपहर के बाद रिक्कत अंगेज दास्तां सुनन से पहले एक लरजा खेज और दर्दनाक मंजर निगाहों के सामने लाइए। सुबह से दोपहर तक खानदाने नुबुवत के तमाम चश्मों चिराग व जुमला आवान व अंसार एक करके शहीद हो गये। नजर के सामने लाशों के अंबार है,उनमें जिगर के टुकड़े भी है और आंख के तारे भी भाई और बहन के लाडले भी हैं, और बाप की निशानियां भी, इन बेगोरों कफन जनाजों पर कौन आसूं बहाये। तन्हा एक हुसैन और दोनों जगह की उम्मीदों का हुजूम।
उन्होंने आगे कहा कि नाना जाना की शरीअत के मुहाफिज हजरत इमाम हुसैन सर से कफन बांध कर जंग में जाने के लिए निकल पड़ते है। अपने नाना जाना पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम का अमामए मुबारक सर पर बांधा। सैयदुश्शुहदा हजरत अमीर हमजा रदियल्लाहु अन्हु की ढाल पुश्त पर रखी। शेरे खुदा हजरत सैयदुना अली की तलवार जुलफिकार गले में हमाइल की और हजरत जाफर तय्यार का नेजा हाथ में लिया। ओर अपने बिरादरे अकबर इमाम हसन का पटका कमर में बांधा। इस तरह शहीदों के आका, जन्नत के नौजवानों के सरदार सब कुछ राहे हक में कुर्बान करने के बाद अब अपनी जाने अज़ीज़ का नज़राना पेश करने के लिए तैयार हो गए। तीन दिन के भूखे प्यासे और अपनी निगाहों के सामने अपने बेटों भाईयों भतीजों और जां निसारों को राहे हक में कुर्बान कर देने वाले इमाम। पहाडों की तरह जमी हुई फौजों के मुकाबले में शेर की तरह डट कर खडे हो गए और मैदाने कर्बला में एक वलवला अंगेज रिज़्ज़ पढी जो आपके नसब और जाती फजाइल पर मुश्त मिल थी और उसमें शामियों को रसूले करीम की नाखुशी व नाराजगी और जुल्म के अंजाम से डराया था। उसके बाद आपने एक फसीह व बलीग तकरीर फरमाई। और जबरदस्त मुकाबला हक और बातिल के बीच शुरू हुआ। तीर नेजा और शमशीर के बहत्तर (72) जख्म खाने के बाद आप सज्दे में गिरे और अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए वासिले बहक हो गए। 65 साल 5 माह 5 दिन की उम्र शरीफ में जुमा के दिन मुहर्रम की दसवीं तारीखें सन् 61 हिजरी मुताबिक 681 इमाम आली मकाम इस दारे फानी से रेहलत फरमा गए।
कार्यक्रम की शुरूआत तिलावत कुरआन पाक से हुई। नात शरीफ हाफीज रहमत अली ने पढ़ी। इस मौके पर मस्जिद के पेश इमाम हाफिज रेयाज अहमद, ताबिश सिद्दीकी, औरंगजेब, मोहम्मद दबीर, हाजी शब्बीर, मोहम्मद हनीफ, मोहम्मद आजम, मोहम्मद शादाब, शहबाज, अशरफ राईनी, सेराज, फैज, फहीम, उबैद सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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