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शनिवार, 2 नवंबर 2024

عرس نظامی حضرت خطیب البراہین علیہ الرحمہ


 

عالم اسلام میں کچھ شخصیتیں ایسی ہوتی ہیں جن کا تذکرہ رحمت ہی رحمت ہے۔

قریب کے سلف صالحین میں ایک عبقری عظیم المرتبت ذات پیر طریقت صوفی با صفا حضرت علامہ *مفتی محمد نظام الدین* معروف خطیب البراہین علیہ الرحمہ کی ہے۔

آپ درس و تدریس کے فرائض بحسن خوبی انجام دینے کے علاوہ ہندوستان و نیپال کے طول و عرض میں اسلام و سنیت کی تبلیغ کا اہم کام انجام دیا شہر و قصبہ اور چھوٹے چھوٹے گاؤں میں بھی تبلیغی مشن جاری رکھتے۔

راقم الحروف جب 1971 تا 1974 عیسوی میں دارالعلوم علیمیہ جمدا شاہی کا با اختیار صدر مدرس تھا اس دور میں بذات خود حضرت خطیب البراہین کی خدمت میں دارالعلوم تنویر الاسلام امر ڈوبھا۔ بستی/سنت کبیر نگر حاضر ہوتا آپ پر چونکہ اس ادارہ میں صدر مدرس و شیخ الحدیث کے منصب پر فائز ہونے کی وجہ سے ذمہ داری زیادہ رہتی، مگر پھر بھی رشد و تبلیغ کا جاری رکھنا بھی اہم کام تھا۔ حضرت کو جمدا شاہی و قرب و جوار کے جلسوں کے لیے دعوت نامہ پیش کرتا حضرت دعوت منظور فرما کر مقررہ تاریخ پر تشریف لاتے۔

1971 سے تا 1974 آپ جمدا شاہی 9 بار تشریف لائے آپ کا ادارہ علیمیہ سے خاص تعلق رہا نورانی مسجد کے شمال میں جو عمارت قائم ہے اس کا سنگ بنیاد آپ نے 1972 میں رکھا۔ سالانہ جلسہ کے علاوہ بھی پروگرام میں تشریف آوری ہوئی آپ سے کثیر تعداد میں جمدا شاہی و قرب و جوار کے لوگ بیعت و مرید ہوئے۔

*پانی والے بابا* غیر مسلم لوگوں میں خطیب البراہین' پانی والے بابا کے نام سے مشہور تھے۔ ایک بار ماہ اگست میں بارش نہ ہونے سے دھان کی فصل کو نقصان کا خطرہ تھا انہی ایام میں حضرت کا پروگرام جمدا شاہی میں ہوا، ختم جلسہ کے بعد خوب گھنگور بارش ہوئی۔

اس برس کے بعد جب کسی سال بارش نہ ہوتی تھی تو رام دیو کمار مدرسہ پر آتا اور کہتا کہ مولانا صاحب پانی والے بابا کو بلائیں تاکہ بارش ہو جائے۔ حضرت تشریف لاتے تقریر ختم ہونے کے بعد اللہ کے فضل و کرم سے بارش ہو جاتی۔

یہ حضرت کی کرم فرمائی تھی کی میری دعوت پر جمدا شاہی، سسواری، پرینہ، گندھریا فیض، پنڈیا، تکیواں، پکری چوبے، منگرہا وغیرہ میں حضرت کا پروگرام ہوتا رہتا۔

*ان کا سایہ ایک تجلی ان کا نقش پا چراغ*

*وہ جدھر گزرے ادھر سے روشنی ہوتی گئی*

ایسی عظیم المرتبت شخصیت صوفی با صفا مقام اگیا سنت کبیر نگر کا عرس سراپا اقدس 3 نومبر 2024ء 30 ربیع الثانی 1446ھ اتوار کو منعقد ہو رہا ہے احباب اہل سنت حضرات شریک ہو کر روح و قلب کو منور فرمائیں۔

اور صاحب سجادہ خانقاہ عالیہ نظامیہ حضرت پیر طریقت علامہ محمد حبیب الرحمن صاحب دامت برکاتہم العالیہ سے ملاقات کا شرف حاصل کریں اور ان کی نصیحت آمیز باتوں کو سن کر عمل کریں۔

الداعی۔ *محمد ایوب قادری* سابق صدر المدرسین دارالعلوم علیمیہ جمدا شاہی بستی

बुधवार, 30 अक्टूबर 2024

12th Urs of Hazrat Sufi Nizamuddin from 3th November


 


  Sant Kabir Nagar .The 12th Urs-e Pak of India's famous Sufi Islamic scholar Hazrat Sufi Muhammad Nizamuddin Barkati (R.A) will be held on 3th November 2024 at Khankahe Nizamia,  Agaya District Sant Kabir Nagar.  The Members of the organizing committee have started preparations for the Urs programme. Hazrat Sufi Nizamuddin (R.A) was a popular and a great Alim-e-Deen and Sufi.His followers are present in large numbers in different provinces of the country, and in the Gulf countries.  Every year his annual Urs Programme is held in a grand form, in which devotees from different provinces of the country are gathered.  Sajjadanshin Hazrat Maulana Habibur Rahman's  Elder Son and  General Secretary of all India Bazme Nizami Hazrat Maulana Ziaul Mustafa Nizami told that, On November 3, after the prayer, (Namaz Fajr) the programme of Urs will start with the recitation Qur'an at the Mazar sharef. After the prayers of Zuhar in the afternoon, the process of Chadar Poshi and Gul Poshi will start at the Mazar sharef and will continue till late evening. Worlds,Nizami conference will be held after the Isha prayer in the night.  In which many Popular Islamic scholars of the country will participate.  On the morning of 4 November, the programme of Urs will be concluded after the Qul Sharif at the (Mazar) tomb.

सोमवार, 5 अगस्त 2024

नहीं दिखा चांद, माहे सफ़र का आगाज़ बुधवार से




आला हज़रत का उर्स -ए-पाक अकीदत के साथ मनाया जाएगा 


गोरखपुर। दीन-ए-इस्लाम के दूसरे माह 'सफ़र' का आगाज़ बुधवार 7 अगस्त से होगा। उलमा किराम ने बताया कि सोमवार को गोरखपुर व आसपास के जिलों में माहे सफ़र का चांद नहीं दिखा। माहे सफ़र में देश-विदेश की अज़ीम मुक़द्दस हस्तियों जैसे सहाबी-ए-रसूल हज़रत सैयदना सलमान फारसी रदियल्लाहु अन्हु, हज़रत सैयदना इमाम हसन रदियल्लाहु अन्हु, अल्लामा फज़ले हक़ खैराबादी, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खां, सुल्तान सलाहुद्दीन अय्यूबी, हज़रत मुजद्दिदे अल्फे सानी इमाम शैख़ अहमद सरहिंदी फारूकी आदि का उर्स-ए-पाक मोहब्बत, अकीदत व एहतराम के साथ मनाया जाता है।    


चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर के इमाम मौलाना महमूद रज़ा क़ादरी ने बताया कि हम हर साल मुक़द्दस हस्तियों का उर्स-ए-पाक तो मना लेते हैं लेकिन उनके अज़ीम कारनामों व तालीम से नवाकिफ रहते हैं, इसलिए इस बार मुक़द्दस हस्तियों की याद में महफिल सजाकर उनके अज़ीम कारनामों व तालीमात पर रोशनी डाली जाए। उर्स-ए-पाक की महफिलों के जरिए मुक़द्दस हस्तियों की ज़िन्दगी, खिदमात व तालीमात से अवाम को रू-ब-रू करवाया जाए।  


सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफ़रा बाजार के इमाम हाफ़िज़ रहमत अली निज़ामी ने बताया कि अवाम में यह गलतफहमी है कि माहे सफ़र में कोई अच्छा काम नहीं करना चाहिए मसलन शादी नहीं करनी चाहिए, किसी से रिश्ते की बात नहीं करनी चाहिए, नया कारोबार नहीं शुरु करना चाहिए और कोई नई चीज़ भी नहीं खरीदनी चाहिए यह सब जिहालत है। माहे सफ़र को बुरा या मनहूस मानना जिहालत है। माहे सफ़र में ज्यादा से ज्यादा इबादत करें। मुक़द्दस हस्तियों की तारीख़ पढ़ें। इसाले सवाब कर खिराजे अकीदत पेश करें। मुक़द्दस हस्तियों के उर्स-ए-पाक पर मस्जिद में महफिल सजाएं, क़ुरआन ख़्वानी, फातिहा ख़्वानी व दुआ ख़्वानी करें।


माहे सफ़र की इन तारीखों में मनाया जाएगा उर्स-ए-पाक


पहली सफ़र को हज़रत हाजी सैयद वारिस अली शाह अलैहिर्रहमां, तीन सफ़र को हज़रत इमाम अबू अब्दुल्लाह मुहम्मद हाकिम मुहद्दिस निशापुरी अलैहिर्रहमां, पांच सफ़र को उम्मुल मोमिनीन हज़रते सैयदा मैमूना रदियल्लाहु अन्हा, छह सफ़र को हज़रत अल्लामा शरीफुल हक़ अमज़दी अलैहिर्रहमां, दस सफ़र को हज़रत अबुल फैज़ सौबान जुन्नून इब्ने इब्राहीम अल मिस्री अलैहिर्रहमां, 11 सफ़र को सहाबी-ए-रसूल हज़रत सैयदना सलमान अल फ़ारसी रदियल्लाहु अन्हु, 12 सफ़र को हज़रत शाह अब्दुर्रहीम मुहद्दिस देहलवी अलैहिर्रहमां, जंगे आज़ादी के अज़ीम मुजाहिद हज़रत शाह अल्लामा फज़ले हक़ खैराबादी अलैहिर्रहमां, 13 सफ़र को हज़रत इमाम अहमद इब्ने शोएब अन नसाई अलैहिर्रहमां, 14 सफ़र को हज़रत ख़्वाजा मालिक बिन दीनार अलैहिर्रहमां, 15 सफ़र हज़रत अल्लामा अरशदुल क़ादरी अलैहिर्रहमां, 18 सफ़र को हज़रत अबू हसन सैयद अली हुजवेरी दाता गंज बख्श अलैहिर्रहमां, 23 सफ़र को हज़रत मखदूम शाह मीना मुहम्मद लखनवी अलैहिर्रहमां, 25 सफ़र को मुजद्दिदे आज़म आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खां फाजिले बरेलवी अलैहिर्रहमां, 27 सफ़र को हज़रत सुल्तान सलाहुद्दीन अय्यूबी अलैहिर्रहमां, हज़रत इमाम बदरुद्दीन महमूद अल ऐनी अलैहिर्रहमां, 28 सफ़र को हज़रत सैयदना इमाम हसन मुज्तबा रदियल्लाहु अन्हु, हज़रत मुजद्दिदे अल्फे सानी इमाम शैख़ अहमद सरहिंदी फारूकी अलैहिर्रहमां का उर्स-ए-पाक मोहब्बत, अकीदत व एहतराम के साथ मनाया जाएगा।

रविवार, 4 अगस्त 2024

आज देखा जाएगा माहे सफ़र का चांद, मनाया जाएगा आला हज़रत का उर्स

गोरखपुर। दीन-ए-इस्लाम के दूसरे माह सफ़र‌ का चांद सोमवार 5 अगस्त को देखा जाएगा। अगर चांद नज़र आ गया तो मंगलवार 6 अगस्त से माहे सफ़र का आगाज़ होगा वहीं अगर चांद नहीं दिखा तो बुधवार 7 अगस्त से माहे सफ़र शुरू होगा। माहे सफ़र में देश-विदेश की अज़ीम मुक़द्दस हस्तियों जैसे सहाबी-ए-रसूल हज़रत सैयदना सलमान फारसी रदियल्लाहु अन्हु, हज़रत सैयदना इमाम हसन रदियल्लाहु अन्हु, अल्लामा फज़ले हक़ खैराबादी, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खां, सुल्तान सलाहुद्दीन अय्यूबी, हज़रत मुजद्दिदे अल्फे सानी इमाम शैख़ अहमद सरहिंदी फारूकी आदि का उर्स-ए-पाक मोहब्बत, अकीदत व एहतराम के साथ मनाया जाता है। चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर के इमाम मौलाना महमूद रज़ा क़ादरी ने बताया कि हम हर साल मुक़द्दस हस्तियों का उर्स-ए-पाक तो मना लेते हैं लेकिन उनके अज़ीम कारनामों व तालीम से नवाकिफ रहते हैं, इसलिए इस बार मुक़द्दस हस्तियों की याद में महफिल सजाकर उनके अज़ीम कारनामों व तालीमात पर रोशनी डाली जाए। उर्स-ए-पाक की महफिलों के जरिए मुक़द्दस हस्तियों की ज़िन्दगी, खिदमात व तालीमात से अवाम को रू-ब-रू करवाया जाए। सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफ़रा बाजार के इमाम हाफ़िज़ रहमत अली निज़ामी ने बताया कि अवाम में यह गलतफहमी है कि माहे सफ़र में कोई अच्छा काम नहीं करना चाहिए मसलन शादी नहीं करनी चाहिए, किसी से रिश्ते की बात नहीं करनी चाहिए, नया कारोबार नहीं शुरु करना चाहिए और कोई नई चीज़ भी नहीं खरीदनी चाहिए यह सब जिहालत है। माहे सफ़र को बुरा या मनहूस मानना जिहालत है। माहे सफ़र में ज्यादा से ज्यादा इबादत करें। मुक़द्दस हस्तियों की तारीख़ पढ़ें। इसाले सवाब कर खिराजे अकीदत पेश करें। मुक़द्दस हस्तियों के उर्स-ए-पाक पर मस्जिद में महफिल सजाएं, क़ुरआन ख़्वानी, फातिहा ख़्वानी व दुआ ख़्वानी करें। माहे सफ़र की इन तारीखों में मनाया जाएगा उर्स-ए-पाक पहली सफ़र को हज़रत हाजी सैयद वारिस अली शाह अलैहिर्रहमां, तीन सफ़र को हज़रत इमाम अबू अब्दुल्लाह मुहम्मद हाकिम मुहद्दिस निशापुरी अलैहिर्रहमां, पांच सफ़र को उम्मुल मोमिनीन हज़रते सैयदा मैमूना रदियल्लाहु अन्हा, छह सफ़र को हज़रत अल्लामा शरीफुल हक़ अमज़दी अलैहिर्रहमां, दस सफ़र को हज़रत अबुल फैज़ सौबान जुन्नून इब्ने इब्राहीम अल मिस्री अलैहिर्रहमां, 11 सफ़र को सहाबी-ए-रसूल हज़रत सैयदना सलमान अल फ़ारसी रदियल्लाहु अन्हु, 12 सफ़र को हज़रत शाह अब्दुर्रहीम मुहद्दिस देहलवी अलैहिर्रहमां, जंगे आज़ादी के अज़ीम मुजाहिद हज़रत शाह अल्लामा फज़ले हक़ खैराबादी अलैहिर्रहमां, 13 सफ़र को हज़रत इमाम अहमद इब्ने शोएब अन नसाई अलैहिर्रहमां, 14 सफ़र को हज़रत ख़्वाजा मालिक बिन दीनार अलैहिर्रहमां, 15 सफ़र हज़रत अल्लामा अरशदुल क़ादरी अलैहिर्रहमां, 18 सफ़र को हज़रत अबू हसन सैयद अली हुजवेरी दाता गंज बख्श अलैहिर्रहमां, 23 सफ़र को हज़रत मखदूम शाह मीना मुहम्मद लखनवी अलैहिर्रहमां, 25 सफ़र को मुजद्दिदे आज़म आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खां फाजिले बरेलवी अलैहिर्रहमां, 27 सफ़र को हज़रत सुल्तान सलाहुद्दीन अय्यूबी अलैहिर्रहमां, हज़रत इमाम बदरुद्दीन महमूद अल ऐनी अलैहिर्रहमां, 28 सफ़र को हज़रत सैयदना इमाम हसन मुज्तबा रदियल्लाहु अन्हु, हज़रत मुजद्दिदे अल्फे सानी इमाम शैख़ अहमद सरहिंदी फारूकी अलैहिर्रहमां का उर्स-ए-पाक मोहब्बत, अकीदत व एहतराम के साथ मनाया जाएगा।

`Gorakhpur ::: माह-ए-सफ़र में मुक़द्दस हस्तियों का विसाल : 1446 हिजरी/2024`

👉 `दीन-ए-इस्लाम का दूसरा महीना` `1. हज़रत सैयद हाजी वारिस अली शाह अलैहिर्रहमां : विसाल 👉 1 सफ़र 1323 हिजरी (6 अप्रैल 1905), मजार 👉देवा शरीफ, उप्र` `2. हज़रत इमाम अबू अब्दुल्लाह मोहम्मद हाकिम मुहद्दिस निशापुरी अलैहिर्रहमां : विसाल 👉 3 सफ़र 403 हिजरी, मजार 👉 निशापुर, ईरान` `3. उम्मुल मोमिनीन हज़रते सैयदा मैमूना रदियल्लाहु अन्हा : विसाल 👉 5 सफ़र 51 हिजरी, मजार 👉 सरीफ, मक्का मुकर्रमा` `4. हज़रत अल्लामा मुफ़्ती हसनैन रज़ा खां अलैहिर्रहमां : विसाल 👉 5 सफ़र 1401 हिजरी, मजार 👉 बरेली शरीफ, उप्र` `5. हज़रत अल्लामा मौलाना शरीफुल हक़ अमज़दी अलैहिर्रहमां : विसाल 👉 6 सफ़र 1420 हिजरी, मजार 👉 घोसी, मऊ` `6. हज़रत सैयद अब्दुल्लाह शाह क़ादरी उर्फ़ बुल्लेह शाह बाबा अलैहिर्रहमां : विसाल 👉 6 सफ़र 1171 हिजरी, मजार 👉कसूर` `7. हज़रत शैख़ बहाउद्दीन ज़करिया मुल्तानी अलैहिर्रहमां : विसाल 👉 7 सफ़र 666 हिजरी, मजार 👉मुल्तान` `8. हज़रत अबुल फैज़ सौबान जुन्नून इब्ने इब्राहीम अल मिस्री अलैहिर्रहमां : विसाल 👉 10 सफ़र 245 हिजरी, मजार 👉कैरो, मिस्र` `9. सहाबी-ए-रसूल हज़रत सैयदना सलमान अल फ़ारसी रदियल्लाहु अन्हु : विसाल 👉 11 सफ़र 33 हिजरी, मजार 👉 मदाइन, इराक` `10. हज़रत मुफ़स्सिरे आज़म मौलाना मोहम्मद इब्राहीम रज़ा खां उर्फ़ जीलानी मियां अलैहिर्रहमां : विसाल 👉 11 सफ़र 1385 हिजरी, मजार 👉 बरेली शरीफ, उप्र` `11. हज़रत शाह अब्दुर्रहीम मुहद्दिस देहलवी अलैहिर्रहमां : विसाल 👉 12 सफ़र 1131 हिजरी, मजार 👉 दिल्ली` `12. हज़रत शाह अल्लामा फज़ले हक़ खैराबादी अलैहिर्रहमां : विसाल 👉 12 सफ़र 1278 हिजरी, मजार 👉 पोर्ट ब्लेयर, अंडमान` `13. हज़रत इमाम अहमद इब्ने शोएब अन नसाई अलैहिर्रहमां : विसाल 👉 13 सफ़र 303 हिजरी, मजार 👉 मक्का मुकर्रमा` `14. हज़रत ख़्वाजा मालिक बिन दीनार अलैहिर्रहमां : विसाल 👉 14 सफ़र 130 हिजरी, मजार 👉 कासरगोड़, केरला` `15. हज़रत अल्लामा मौलाना अरशदुल क़ादरी अलैहिर्रहमां : विसाल 👉 15 सफ़र 1423 हिजरी, मजार 👉 जमशेदपुर, झारखंड` `16. हज़रत अबू हसन सैयद अली हुजवेरी दाता गंज बख्श अलैहिर्रहमां : विसाल 👉 18 सफ़र 465 हिजरी, मजार 👉 पाक` `17. हज़रत मखदूम शाह मीना मोहम्मद लखनवी अलैहिर्रहमां : विसाल 👉 23 सफ़र 884 हिजरी, मजार 👉 लखनऊ, उप्र` `18. मुजद्दिदे आज़म आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खां फाजिले बरेलवी अलैहिर्रहमां : विसाल 👉 25 सफ़र 1340 हिजरी, मजार 👉 बरेली शरीफ, उप्र` `19. हज़रत सुल्तान सलाहुद्दीन अय्यूबी अलैहिर्रहमां : विसाल 👉 27 सफ़र 589 हिजरी, मजार 👉 दमिश़्क, सीरिया` `20. हज़रत इमाम बदरुद्दीन महमूद अल ऐनी अलैहिर्रहमां : विसाल 👉 27 सफ़र 855 हिजरी, मजार 👉 कैरो, मिस्र` `21. हज़रत सैयदना इमाम हसन मुज्तबा रदियल्लाहु अन्हु : विसाल 👉 28 सफ़र 50 हिजरी, मजार 👉 जन्नतुल बकीं, मदीना मुनव्वरा` `22. हज़रत मुजद्दिदे अल्फे सानी इमाम शैख़ अहमद सरहिंदी फारूकी अलैहिर्रहमां : विसाल 👉 28 सफ़र 1034 हिजरी, मजार 👉 सरहिंद, पंजाब`

मंगलवार, 30 जुलाई 2024

दीन-ए-इस्लाम के दामन से रौशनी मिलेगी: कारी फिरोज

 सैयद फरहान अहमद कादरी 

गोरखपुर। हाशमी कमेटी की ओर से पहाड़पुर में जलसा-ए-ईद मिलादुन्नबी का आयोजन हुआ। मुख्य वक्ता कारी शमीम अख्तर व नायब काजी मुफ्ती मो. अजहर शम्सी ने कहा कि क़ुरआन में अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है रसूल जो दें वह ले लो और जिससे मना करें उससे रुक जाओ। अल्लाह का यह फरमान हर दौर के लिए है। रसूल-ए-पाक हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमारे आइडियल हैं। हमें उन्हीं के नक्शेक़दम पर चलकर दीन व दुनिया की कामयाबी मिल सकती है। रसूल-ए-पाक की तालीमात पर अमल कर दुनिया वालों के लिए बेहतरीन नमूना बनें। इससे रसूल-ए-पाक खुश होंगे। दीन-ए-इस्लाम अमनो सलामती का मजहब है।

विशिष्ट वक्ता कारी फिरोज आलम ने कहा कि मुसलमानों के ज्ञान व विद्या में किए गये कारनामों को नई नस्ल के सामने पेश किया जाए और उन्हें यह एहसास कराया जाए कि दीन-ए-इस्लाम के दामन से ही रौशनी मिलेगी। दीन-ए-इस्लाम की रौशनी इंसान को फायदा पहुंचाने वाली है। हम पश्चिमी जगत की भौतिक उन्नति देखकर हीन-भावना का शिकार न हों और विज्ञान व टेक्नाॅलाजी के क्षेत्र में आगे आएं।

नात-ए-पाक हाफिज जुनैद आलम, शहनवाज आलम, मो. सलीम अहमद ने पेश की। अंत में सलातो सलाम पढ़ कर दुआ मांगी गई। जलसे में इं. काविश हाशमी, हाफिज अजीम अहमद, शाकिब हाशमी, अलाउद्दीन अहमद हाशमी, शहबाज तनवीर, मो. आरिफ, मो. समद, अफजाल आलम, मनोव्वर अहमद आदि ने शिरकत की।

गुरुवार, 20 फ़रवरी 2020

गोरखपुर : उर्स में पढ़ी गई संविधान की प्रस्तावना, सीएए, एनआरसी व एनपीआर वापस लेने की हुई दुआ



गोरखपुर। तुर्कमानपुर स्थित दरगाह पर हजरत इमदाद शाह रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स-ए-पाक बुधवार को अकीदत के साथ मनाया गया। कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। उर्स-ए-पाक के मौके पर भारतीय संविधान की प्रस्तावना पढ़ी गई। सीएए, एनआरसी व एनपीआर के विरोध में जगह-जगह हो रहे ऐतिहासिक शाहीन बाग़ आंदोलन की कामयाबी और सीएए, एनआरसी व एनपीआर वापस लिए जाने की दुआएं मांगी गई। मुल्क में अमनो सलामती, भाईचारगी व तरक्की की भी दुआ की गई।

इस मौके पर बच्चों के बीच नातिया मुकाबला हुआ। जिसमें मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार, मदरसा रज़विया मेराजुल उलूम चिलमापुर, मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर व मदरसा फ़ैजाने मुबारक खां शहीद नार्मल के बच्चों ने रसूल-ए-पाक की शान में शानदार नात-ए-पाक पढ़ी। नातिया मुकाबले के विजेता बच्चों को उलेमा-ए-किराम ने पुरस्कृत किया। इसके बाद जलसा-ए-ईद मिलादुन्नबी हुआ। जिसमें मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी व मौलाना मो. असलम रज़वी ने अल्लाह तआला, रसूल-ए-पाक हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम, सहाबा-ए-किराम, अहले बैत व औलिया-ए-किराम की शान में तकरीर की। अंत में दरुदो सलाम पढ़कर जलसा समाप्त हुआ। अकीदतमंदों ने चादर पेश की। शीरीनी व लंगर बांटा गया।

उर्स में मो. इस्लाम उर्फ बाबूल, अबरार अहमद, मनोव्वर अहमद, अलाउद्दीन निज़ामी, समीर, रमज़ान अली, मौलाना मकसूद आलम, हाफिज अजीम यारलवी, मो. अब्दुस्समद, इमादुद्दीन, शाह फैसल, एडवोकेट तौहीद अहमद, एडवोकेट शुएब अहमद, हाजी नबी अहमद, मुंशी रजा, मो. कलीम अशरफ खान, शहबाज खान सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

मंगलवार, 11 फ़रवरी 2020

गोरखपुर : आप की जीत व शाहीन बाग़ के सम्मान में चढ़ायी चादर


गोरखपुर। नई दिल्ली के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की बम्पर जीत और सीएए, एनआरसी व एनपीआर के खिलाफ   शाहीन बाग़, जामिया, एएमयू, घंटाघर में चल रहे आंदोलन के सम्मान में मंगलवार को नार्मल स्थित दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद में चादर चढ़ा कर सीएए, एनआरसी व एनपीआर से निज़ात की दुआ मांगी गई।

चादर चढ़ाने वाले युवाओं ने कहा कि नई दिल्ली विधानसभा चुनाव में देश तोड़ने वालों के खिलाफ जनता ने जमकर वोट किया। देश में नफरतों की राजनीति करने वाले सियासी दल व महिलाओं के आंदोलन पर बदजुबानी करने वाले नेताओं को जनता ने अपने वोट की ताकत से नकार दिया। आम आदमी पार्टी की जीत हिन्दुस्तान की गंगा जमुनी तहजीब व विकास की जीत है। शाहीन बाग़ में आंदोलन कर रही महिलाओं व छात्रों पर अनापशनाप आरोप लगाने वाले लोग दूषित मानसिकता के लोग हैं। मुस्लिम महिलाओं पर व उनके बुर्के पर तंज करने वाले मनोरोगी है। हमारी यही दुआ है कि सीएए, एनआरसी व एनपीआर का जल्द खात्मा हो। देश में मौजूद तमाम शाहीन बाग़ों में बैठी महिलाओं को जल्द इंसाफ मिले। जामिया, एएमयू, जेेएनयू के छात्रों पर जुल्मों सितम रुक जाये। गार्गी कालेज की लड़कियों को इंसाफ मिले। सीेएए, एनआरसी व एनपीआर के खिलाफ चल रहे आंदोलन में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को न्याय मिले। हिन्दुस्तान में अमन मोहब्बत कायम रहे।

चादर चढ़ाने वालों में मोहसिन खान गोल्डी, मनोव्वर अहमद, महबूब आलम, मो. अतहर, एस.एफ.अहमद सहित तमाम लोग मौजूद रहे।