अल्लाह को राजी करने के लिए कुर्बानी करें : मुफ्ती अजहर




-दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद पर दर्स का पांचवां दिन


गोरखपुर। तंजीम उलेमा-ए-अहले सुन्नत की जानिब से नार्मल स्थित दरगाह मुबारक खां शहीद मस्जिद में कुर्बानी पर दस दिवसीय दर्स (व्याख्यान) कार्यक्रम के पांचवें  दिन रविवार को इस्लामिक वक्ता मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि इस्लाम में जानवरों की कुर्बानी देने के पीछे एक मकसद है। अल्लाह दिलों के हाल से वाकिफ है। ऐसे में अल्लाह हर शख्स की नियत को समझता है। जब बंदा अल्लाह का हुक्म मानकर महज अल्लाह की रजा के लिए कुर्बानी करता है तो उसे अल्लाह की रजा हासिल होती है। बावजूद इसके अगर कोई शख्स कुर्बानी महज दिखावे के तौर पर करता है तो अल्लाह उसकी कुर्बानी कुबूल नहीं करता।

उन्होंने बताया कि कुर्बानी के गोश्त के तीन हिस्से करने की शरीयत में सलाह है। एक हिस्सा गरीबों में तकसीम किया जाए, दूसरा हिस्सा अपने दोस्त अहबाब के लिए इस्तेमाल किया जाए और तीसरा हिस्सा अपने घर में इस्तेमाल किया जाए। गरीबों में गोश्त बांटना मुफीद है।


दरगाह मस्जिद के इमाम मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने कहा कि कुर्बानी के लिए होने वाले जानवरों पर अलग-अलग हिस्से हैं। जहां बड़े जानवरों पर सात हिस्से होते हैं तो वहीं बकरे जैसे छोटे जानवरों पर महज एक हिस्सा होता है। मतलब साफ है कि अगर कोई शख्स भैंस की कुर्बानी कराता है तो उसमें सात लोगों को शामिल किया जा सकता है तो वहीं बकरे की कराता है तो वो सिर्फ एक शख्स की तरफ से होगी।


इस मौके पर मोहम्मद आजम, कारी शराफत हुसैन कादरी, कारी महबूब रजा, अब्दुल अजीज, शहादत अली, अजीम, अनवर हुसैन, अशरफ, सैफ रजा, शारिक, शाकिब,  मनौव्वर अहमद, तौहीद अहमद, मोहम्मद अतहर, मोहम्मद सैफ, मोहम्मद कैफ, नूर मोहम्मद दानिश, रमजान, कुतबुद्दीन, नवेद आलम, अब्दुल राजिक, आदि मौजूद रहे।

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नी में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लें।

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