एक बार एक बादशाह अपने कुछ खास दरबारियों के साथ सफर पर निकला। रास्ता लंबा था और दोपहर की गर्मी बहुत तेज थी। कुछ दूर चलने के बाद बादशाह ने एक छोटे से गांव के पास पड़ाव डालने का आदेश दिया।
बादशाह ने अपने रसोइए से कहा, "आज कुछ साधारण लेकिन स्वादिष्ट खाना बनाओ।"
रसोइए ने सामान देखा तो पता चला कि नमक खत्म हो चुका है। उसने बादशाह से पूछा, "हुजूर, नमक कहाँ से लाऊँ?"
बादशाह ने गांव की ओर इशारा करते हुए कहा, "वहाँ से ले आओ और उसकी कीमत चुका देना।"
दरबार में बैठे एक आदमी ने हँसकर कहा, "जहाँपनाह, आप इतने बड़े बादशाह हैं। कुछ चुटकी नमक के लिए भी कीमत देने की क्या जरूरत है? गांव वाले तो खुशी-खुशी दे देंगे।"
बादशाह ने उसकी ओर गंभीरता से देखा और कहा, "आज अगर मैं बिना कीमत दिए एक मुट्ठी नमक ले लूँ, तो कल मेरे अधिकारी गांव से एक बोरी नमक उठा ले जाएंगे। फिर उससे बड़ी चीज मांगेंगे। धीरे-धीरे गरीबों की चीजें छीनना उन्हें अपना अधिकार लगने लगेगा।"
दरबारी बोला, "लेकिन हुजूर, इतनी छोटी चीज से क्या फर्क पड़ेगा?"
बादशाह ने कहा, "अन्याय की शुरुआत हमेशा छोटी चीज से होती है।"
रसोइया गांव गया और नमक खरीदकर ले आया।
खाना तैयार हुआ। बादशाह ने भोजन किया और फिर अपने साथियों से कहा, "याद रखो, राज्य केवल बड़ी चोरियों से बर्बाद नहीं होते। जब शासक छोटी बेईमानी को नजरअंदाज करने लगता है, तो उसके कर्मचारी उससे बड़ी बेईमानी सीखते हैं।"
एक बूढ़ा दरबारी बोला, "हुजूर, आपका मतलब है कि राजा का छोटा-सा व्यवहार भी पूरी प्रजा के लिए मिसाल बन जाता है?"
बादशाह ने कहा, "बिल्कुल। अगर ऊपर बैठा आदमी ईमानदार है तो नीचे वालों के लिए ईमानदारी आसान होती है। अगर ऊपर वाला ही लालच करे तो नीचे वालों को रोकना मुश्किल हो जाता है।"
सफर समाप्त हुआ और वे राजधानी लौट आए।
कुछ महीनों बाद बादशाह को पता चला कि एक अधिकारी गरीब किसानों से जबरन अनाज वसूल रहा है। बादशाह ने उसे तुरंत पद से हटा दिया।
दरबारियों ने पूछा, "इतनी बड़ी सजा क्यों?"
बादशाह ने कहा, "जिसने छोटी चीज में ईमानदारी की कीमत नहीं समझी, वह बड़ी चीज में भी ईमानदार नहीं रह सकता।"
सीख: बेईमानी की शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन उसका परिणाम बहुत बड़ा होता है। जो व्यक्ति छोटी चीजों में ईमानदार रहता है, वही बड़ी जिम्मेदारी के योग्य होता है।

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