वह आदमी जो अपनी परछाईं से डरता था

एक आदमी अपनी जिंदगी से बहुत परेशान था। उसे हमेशा लगता था कि दूसरे लोग उससे ज्यादा सुखी हैं। किसी के पास अच्छा घर था तो उसे अपना घर छोटा लगता। किसी के पास सुंदर कपड़े होते तो उसे अपने कपड़ों पर शर्म आने लगती। किसी के पास अधिक धन होता तो वह अपनी गरीबी को कोसने लगता।


एक दिन उसने एक बुद्धिमान बुजुर्ग से कहा, "मेरी जिंदगी में कोई खुशी नहीं है। मैं दूसरों को देखता हूँ तो लगता है कि दुनिया में सबको सब कुछ मिल गया, सिर्फ मैं ही खाली हाथ हूँ।"


बुजुर्ग ने कहा, "कल सुबह मेरे पास आना। मैं तुम्हें एक ऐसी चीज दिखाऊँगा जिससे तुम्हारी समस्या खत्म हो जाएगी।"


अगली सुबह वह आदमी पहुँचा। बुजुर्ग ने उसे एक सुनसान मैदान में ले जाकर कहा, "अपने पीछे देखो।"


आदमी ने अपनी परछाईं देखी।


बुजुर्ग ने पूछा, "यह क्या है?"


"मेरी परछाईं।"


"क्या यह हमेशा तुम्हारे साथ रहती है?"


"हाँ।"


"क्या तुम इससे बच सकते हो?"


आदमी ने दौड़ना शुरू किया। परछाईं उसके साथ दौड़ने लगी। वह एक पेड़ के पीछे छिपा, परछाईं भी उसके नीचे दिखाई देने लगी।


वह परेशान होकर बोला, "यह मेरा पीछा क्यों नहीं छोड़ती?"


बुजुर्ग मुस्कुराए और बोले, "क्योंकि तुम उससे भाग रहे हो।"


आदमी ने कहा, "तो क्या करूँ?"


बुजुर्ग ने उसे वहीं खड़ा कर दिया और कहा, "अब भागो मत। सूरज की ओर मुंह करके खड़े हो जाओ।"


आदमी ने ऐसा ही किया। उसकी परछाईं उसके पीछे चली गई और सामने से दिखाई देना बंद हो गई।


बुजुर्ग ने कहा, "तुम्हारी परेशानी भी ऐसी ही है। तुम दूसरों की जिंदगी की ओर देखते हो और अपनी जिंदगी की कमियों को गिनते रहते हो। जितना उनसे भागोगे, उतनी ही बेचैनी तुम्हारा पीछा करेगी।"


आदमी ने पूछा, "लेकिन मैं अपनी हालत कैसे बदलूँ?"


बुजुर्ग ने कहा, "दूसरों से तुलना करना बंद करो। अपने आज को अपने कल से बेहतर बनाने की कोशिश करो।"


आदमी कुछ देर चुप रहा।


बुजुर्ग ने कहा, "किसी की चमक देखकर अपने जीवन को अंधेरा मत समझो। तुम्हें उसकी पूरी जिंदगी नहीं दिखाई देती, सिर्फ वह हिस्सा दिखाई देता है जिसे वह दुनिया के सामने रखना चाहता है।"


उस दिन आदमी पहली बार अपने घर लौटा तो उसने अपनी पत्नी, बच्चों और छोटी-सी दुकान को ध्यान से देखा। उसे महसूस हुआ कि जिन चीजों को वह मामूली समझ रहा था, वही उसकी असली दौलत थीं।


उसने अगले दिन से शिकायत करना छोड़ दिया और मेहनत शुरू कर दी।


कुछ वर्षों में उसकी दुकान चल निकली।


लेकिन उसकी सबसे बड़ी सफलता धन नहीं थी। सबसे बड़ी सफलता यह थी कि अब वह दूसरों की खुशियों से दुखी नहीं होता था।


सीख: तुलना इंसान की खुशी की सबसे बड़ी दुश्मनों में से एक है। अपनी जिंदगी को दूसरों की जिंदगी से नहीं, अपने पिछले कल से तुलना करो।

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