घमंडी आदमी और आईना


 


एक शहर में एक आदमी रहता था जिसे दूसरों की कमियाँ निकालने की बहुत आदत थी। कोई गरीब दिखाई देता तो वह उसके कपड़ों पर टिप्पणी करता। किसी से गलती हो जाती तो उसका मजाक उड़ाता। कोई कम पढ़ा-लिखा होता तो उसे अपने से कम समझता।


एक दिन वह एक बुज़ुर्ग के पास गया और बोला, “मैं समझ नहीं पाता कि लोग इतने दोषों के साथ कैसे जीते हैं।”


बुज़ुर्ग ने उसे एक आईना दिया और कहा, “इसे अपने पास रखो और जब भी किसी में कोई कमी दिखाई दे, पहले इसमें अपना चेहरा देखना।”


वह आदमी हँसा और बोला, “मेरे चेहरे का इससे क्या संबंध?”


बुज़ुर्ग ने कहा, “बस ऐसा ही करना।”


कुछ दिनों बाद वह बाजार गया। उसे एक आदमी बहुत गुस्सैल दिखाई दिया। उसने आईना निकाला और अपना चेहरा देखा। उसके चेहरे पर भी गुस्सा था।


फिर उसने एक गरीब आदमी को देखा। उसने आईना देखा और सोचा, “क्या मैंने कभी इस आदमी की मजबूरी समझने की कोशिश की?”


धीरे-धीरे उसे एहसास होने लगा कि दूसरों की कमियाँ देखकर उसे जो आनंद मिलता था, वह उसके अपने अहंकार की निशानी थी।


वह बुज़ुर्ग के पास वापस आया और बोला, “अब मुझे दूसरों में कमी दिखाई देती है तो पहले अपने अंदर देखने की कोशिश करता हूँ।”


बुज़ुर्ग ने कहा, “यही आत्म-सुधार की शुरुआत है।”


सीख: दूसरों का हिसाब लेने से पहले अपने दिल का हिसाब लेना चाहिए।

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