मिट्टी और कुम्हार


 


एक कुम्हार के पास मिट्टी का एक ढेर था। वह मिट्टी को उठाता, पानी मिलाता और उसे बार-बार गूँधता।

मिट्टी को जैसे शिकायत थी। वह सोचती, “मुझे बार-बार क्यों दबाया जा रहा है?”

फिर कुम्हार ने उसे चाक पर रखा। मिट्टी तेजी से घूमने लगी। कुम्हार ने उसे दोनों हाथों से दबाया और एक आकार देना शुरू किया।

मिट्टी को लगा कि उसकी परेशानी खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही।

लेकिन अभी काम पूरा नहीं हुआ था।

कुम्हार ने उस बने हुए घड़े को भट्ठी में रख दिया। तेज गर्मी में घड़ा तपने लगा।

मिट्टी जैसे कह रही थी, “इतनी कठिनाइयों के बाद अब आग भी!”

कुछ समय बाद कुम्हार ने घड़े को बाहर निकाला। अब वह मजबूत और सुंदर था।

उसी समय एक बच्चा आया और बोला, “कितना सुंदर घड़ा है!”

मिट्टी ने जैसे पहली बार अपनी पूरी यात्रा को समझा। अगर वह केवल अपनी तकलीफ देखती रहती तो कभी नहीं समझ पाती कि कुम्हार उसे किस रूप में बदल रहा था।

इंसान की जिंदगी में भी कुछ कठिनाइयाँ ऐसी होती हैं जिनका अर्थ हमें उसी समय समझ नहीं आता। असफलता, इंतजार, मेहनत और मुश्किल परिस्थितियाँ कभी-कभी हमारे अंदर धैर्य, समझ और मजबूती पैदा करती हैं।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हर दुख अच्छा है; बल्कि यह कि कठिन समय में भी इंसान सीख और सुधार का रास्ता खोज सकता है।

सीख: कठिन परिस्थितियाँ हमें तोड़ने के बजाय सही सोच और सब्र के साथ मजबूत भी बना सकती हैं।

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