एक राजा अपने दरबारियों से अक्सर एक सवाल पूछता था, “इंसान के लिए सबसे जरूरी समय कौन-सा है?”
कोई कहता, “भविष्य के लिए तैयारी का समय।”
दूसरा कहता, “मुसीबत आने का समय।”
तीसरा कहता, “जब कोई बड़ा फैसला लेना हो।”
राजा किसी जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ।
एक दिन वह एक बुज़ुर्ग दरवेश के पास पहुँचा और वही सवाल पूछा।
दरवेश ने कहा, “सबसे जरूरी समय वही है जिसमें तुम अभी मौजूद हो।”
राजा ने पूछा, “और सबसे जरूरी इंसान कौन है?”
दरवेश बोला, “जो इस समय तुम्हारे सामने है।”
राजा ने फिर पूछा, “और सबसे जरूरी काम?”
दरवेश ने कहा, “उस इंसान के साथ भलाई करना, क्योंकि तुम्हें नहीं मालूम कि अगले पल क्या होगा।”
राजा बहुत देर तक चुप रहा।
उसे याद आया कि दरबार में आने वाले गरीब, मजदूर और फरियादी कई बार उसके सामने खड़े होते थे, लेकिन वह उन्हें बाद में देखने के लिए कह देता था।
उस दिन उसने फैसला किया कि जब कोई जरूरतमंद उसके सामने आएगा तो वह उसे केवल एक परेशान करने वाला व्यक्ति नहीं समझेगा, बल्कि एक इंसान समझकर उसकी बात सुनेगा।
रूमी की शिक्षाओं में वर्तमान क्षण की जागरूकता और इंसान के साथ भलाई करने पर विशेष जोर मिलता है।
सीख: वर्तमान समय को बेकार न जाने दें। आपके सामने जो इंसान है, उसके साथ अच्छा व्यवहार करना भी बड़ी नेकी है।

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