एक आदमी बहुत दूर से चलकर आया। वह प्यास से परेशान था। अचानक उसे एक बड़ी नदी दिखाई दी।
वह नदी के किनारे बैठ गया लेकिन पानी पीने से डरने लगा।
उसने कहा, “यह नदी बहुत बड़ी है। अगर मैं इसमें उतर गया तो बह जाऊँगा।”
एक मुसाफिर ने कहा, “तुम्हें नदी पार नहीं करनी है। सिर्फ़ अपनी प्यास बुझानी है।”
उस आदमी ने हाथ में थोड़ा पानी लिया और पी लिया।
उसकी प्यास कम हो गई।
मुसाफिर ने कहा, “देखा? तुमने पूरी नदी को खत्म नहीं किया। सिर्फ़ उतना पानी लिया जितनी तुम्हें जरूरत थी।”
आदमी मुस्कुराया।
वह बोला, “मैंने अपनी जरूरत से ज्यादा समस्या बना ली थी।”
मुसाफिर ने कहा, “इंसान की जिंदगी में भी ऐसा होता है। वह भविष्य की सारी परेशानियों को आज ही अपने सिर पर रख लेता है। फिर उसे वर्तमान का छोटा-सा रास्ता भी बहुत कठिन लगता है।”
आदमी ने पूछा, “तो क्या करना चाहिए?”
मुसाफिर ने कहा, “जो काम आज तुम्हारे सामने है, पहले उसे पूरा करो। कल की चिंता कल करना।”
यह बात उस आदमी के दिल में उतर गई।
रूमी की शिक्षाओं में इंसान को भय, लालच और कल्पना के बोझ से बाहर निकलकर वास्तविकता को समझने की प्रेरणा मिलती है।
सीख: पूरी जिंदगी की चिंता एक साथ मत उठाइए। आज का सही कदम उठाइए और आगे बढ़ते रहिए।

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