दरवाजे पर खड़ा अजनबी


 एक शहर में एक बहुत अमीर व्यक्ति रहता था। उसके घर का दरवाजा हमेशा बंद रहता था। बाहर से देखने पर घर शानदार था, लेकिन अंदर रहने वाला आदमी बेहद कंजूस था।


एक रात तेज बारिश हो रही थी। आधी रात के करीब किसी ने उसके दरवाजे पर दस्तक दी।


अमीर आदमी ने खिड़की से देखा। बाहर एक अजनबी भीगा हुआ खड़ा था।


उसने पूछा, "कौन हो?"


अजनबी ने कहा, "मुसाफिर हूँ। रात गुजारने के लिए थोड़ी जगह चाहिए।"


अमीर आदमी ने कहा, "आगे जाओ। मेरे घर में जगह नहीं है।"


अजनबी ने कहा, "आपके घर में इतने बड़े कमरे हैं। मुझे बस एक कोना चाहिए।"


अमीर आदमी ने दरवाजा नहीं खोला।


अजनबी ने फिर कहा, "अगर घर में जगह नहीं है तो बरामदे में ही बैठने दीजिए।"


"नहीं।"


"तो कम से कम छत के नीचे खड़ा होने दीजिए।"


"नहीं।"


आखिर वह मुसाफिर बारिश में आगे चला गया।


सुबह अमीर आदमी ने देखा कि उसके दरवाजे के पास एक छोटी-सी गठरी पड़ी है। उसने उठाकर खोली तो उसमें कुछ पुराने कपड़े और एक किताब थी।


किताब के पहले पन्ने पर लिखा था:


"जिस दरवाजे पर किसी मजबूर को जगह न मिले, वहाँ दौलत का होना भी बेकार है।"


अमीर आदमी सोच में पड़ गया।


उसने नौकर से पूछा, "वह मुसाफिर कौन था?"


नौकर ने कहा, "मुझे नहीं मालूम। शायद कोई गरीब यात्री था।"


अमीर आदमी ने कहा, "उसकी गठरी मुझे वापस करनी है।"


नौकर ने बहुत खोजा, लेकिन वह आदमी कहीं नहीं मिला।


उस दिन से अमीर आदमी के भीतर एक बेचैनी पैदा हो गई। उसके पास सब कुछ था, मगर पहली बार उसे लगा कि उसके घर में इंसानियत की कमी है।


कुछ समय बाद शहर में अकाल पड़ा। बहुत से गरीब लोग भोजन के लिए उसके घर के पास आने लगे।


पहले वह उन्हें डांटकर भगा देता था। लेकिन अब वह हर दिन दरवाजा खोलकर जरूरतमंदों को भोजन देने लगा।


उसके एक मित्र ने पूछा, "अचानक तुम्हारा दिल कैसे बदल गया?"


अमीर आदमी ने कहा, "मुझे एक रात समझ आया कि बड़ा घर वह नहीं जिसमें बहुत कमरे हों। बड़ा घर वह है जिसमें किसी जरूरतमंद के लिए जगह हो।"


उसने अपने घर का एक हिस्सा मुसाफिरों और गरीबों के लिए खोल दिया।


वर्षों बाद जब वह बूढ़ा हुआ, शहर के लोग उसके घर को "खुले दरवाजे वाला घर" कहने लगे।


वह अक्सर कहता था, "जिस दिन मैंने दरवाजा बंद किया था, उस दिन मैंने सिर्फ एक मुसाफिर को नहीं लौटाया था; मैंने अपनी इंसानियत को भी बाहर खड़ा कर दिया था।"


सीख: किसी जरूरतमंद के लिए थोड़ी-सी जगह, थोड़ा-सा समय और थोड़ी-सी मदद हमारे लिए छोटी हो सकती है, लेकिन उसके लिए वही पूरी दुनिया बन सकती है।

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