तलवार से बड़ी चीज़

एक बादशाह का एक सेनापति बहुत बहादुर था। उसने कई युद्ध जीते थे और अपनी तलवार पर उसे बहुत गर्व था।


एक दिन उसने दरबार में कहा, "जहाँपनाह, दुनिया में सबसे बड़ी ताकत तलवार है। जिसके हाथ में तलवार हो, वही ताकतवर है।"


दरबार में बैठे एक बुजुर्ग विद्वान ने कहा, "तलवार ताकतवर है, लेकिन उससे भी बड़ी ताकत एक ऐसी चीज है जिसे तलवार काट नहीं सकती।"


सेनापति हँसा।


उसने पूछा, "वह क्या है?"


विद्वान ने कहा, "सच्ची बात।"


सेनापति ने कहा, "क्या सच तलवार से ज्यादा ताकतवर हो सकता है?"


विद्वान ने कहा, "अगर तलवार किसी आदमी को चुप करा सकती है तो क्या वह उसके विचार को भी खत्म कर सकती है?"


सेनापति चुप रहा।


बादशाह ने विद्वान से कहा, "अपनी बात साबित करो।"


कुछ दिनों बाद राज्य के एक हिस्से में किसानों पर भारी कर लगा दिया गया। अधिकारी ने झूठी रिपोर्ट भेजी कि किसानों ने कर देने से इनकार किया है।


बादशाह गुस्से में था और उसने सैनिक भेजने का आदेश दिया।


तभी एक बूढ़ा किसान दरबार में पहुँचा। उसने कहा, "जहाँपनाह, हमने कर देने से इनकार नहीं किया। हमारी फसल ही खराब हो गई है। हमारे पास देने को कुछ नहीं है।"


सेनापति ने कहा, "यह झूठ बोल रहा है।"


किसान ने अपनी मुट्ठी खोलकर सूखे हुए अनाज के कुछ दाने बादशाह के सामने रख दिए।


उसने कहा, "हुजूर, अगर खेत में अनाज पैदा होता तो हम कर देते। आप हमारे खेत देख लीजिए।"


बादशाह ने जांच करवाई। पता चला कि किसान सच बोल रहा था और अधिकारी ने झूठी रिपोर्ट भेजी थी।


बादशाह ने अधिकारी को दंड दिया और किसानों का कर माफ कर दिया।


फिर उसने विद्वान से कहा, "आज समझ में आया कि सच तलवार से बड़ी ताकत क्यों है। तलवार से मैं डर पैदा कर सकता हूँ, लेकिन सच मुझे न्याय का रास्ता दिखाता है।"


विद्वान ने कहा, "तलवार राज्य की सीमा बचा सकती है, लेकिन न्याय राज्य के दिल को बचाता है।"


सेनापति ने सिर झुका लिया।


उसने अपनी तलवार की ओर देखा और पहली बार उसे लगा कि हथियार हाथ में होना बड़ी बात नहीं है; बड़ी बात यह है कि उसका इस्तेमाल कब और क्यों किया जाए।


सीख: ताकत का असली मूल्य दूसरों को डराने में नहीं, बल्कि न्याय की रक्षा करने में है। सत्य और न्याय के सामने केवल हथियारों की शक्ति अधूरी है।

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