बंद मुट्ठी और रेत


 


एक आदमी समुद्र के किनारे घूम रहा था। उसने मुट्ठी में रेत भरी और उसे बहुत कसकर पकड़ लिया।

कुछ ही देर में उसकी मुट्ठी से रेत नीचे गिरने लगी।

उसने और जोर लगाया, लेकिन जितना कसकर पकड़ता, उतनी ही रेत बाहर निकलती।

पास बैठे एक बुज़ुर्ग ने कहा, “हाथ थोड़ा ढीला करो।”

आदमी ने पूछा, “अगर मैं ढीला कर दूँगा तो सारी रेत गिर जाएगी।”

बुज़ुर्ग ने कहा, “कोशिश करके देखो।”

उसने मुट्ठी थोड़ी ढीली की। अब रेत कम गिर रही थी।

बुज़ुर्ग ने कहा, “हर चीज़ को अपने अधिकार में रखने की कोशिश मत करो। कुछ चीज़ें प्यार से साथ रहती हैं, मजबूरी से नहीं।”

आदमी ने पूछा, “क्या यही बात रिश्तों पर भी लागू होती है?”

बुज़ुर्ग ने कहा, “हाँ। इंसान जब किसी को अपना समझकर उसकी आजादी छीनने लगता है तो रिश्ता कमजोर हो जाता है। लेकिन सम्मान, विश्वास और प्रेम से रिश्ता मजबूत होता है।”

आदमी देर तक समुद्र को देखता रहा।

उसे समझ आया कि जिंदगी में कई चीज़ें ऐसी हैं जिन्हें संभालने का सबसे अच्छा तरीका उन्हें कसकर पकड़ना नहीं, बल्कि समझदारी से जगह देना है।

सीख: जरूरत से ज्यादा पकड़ और नियंत्रण कई बार उसी चीज़ को हमसे दूर कर देता है जिसे हम बचाना चाहते हैं।

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