खाली कटोरा

 


एक युवक एक प्रसिद्ध विद्वान के पास ज्ञान लेने गया। वह बहुत पढ़ा-लिखा था और उसे अपनी बुद्धि पर बहुत गर्व था।

विद्वान ने पूछा, “तुम क्या सीखना चाहते हो?”

युवक ने जवाब देना शुरू किया और अपनी सारी जानकारी बताने लगा। वह विद्वान को भी बीच-बीच में रोककर अपनी बातें बताता रहा।

विद्वान चुपचाप उसकी बात सुनता रहा।

फिर उसने चाय का एक कप उठाया और उसमें चाय डालने लगा। कप भर गया, लेकिन वह चाय डालता रहा। चाय बाहर गिरने लगी।

युवक बोला, “उस्ताद! कप भर गया है। इसमें अब और चाय नहीं आ सकती।”

विद्वान मुस्कुराया और बोला, “तुम भी इसी कप की तरह हो। तुम्हारा मन अपनी ही बातों से इतना भरा हुआ है कि उसमें नई बात के लिए जगह नहीं।”

युवक को अपनी गलती समझ आने लगी।

विद्वान ने कहा, “ज्ञान पाने के लिए केवल पढ़ना काफी नहीं। कभी-कभी अपने मन को खाली करना पड़ता है। जो व्यक्ति हर बात में खुद को सही समझता है, वह नई बात सीखने का दरवाजा खुद बंद कर देता है।”

युवक ने सिर झुका लिया और पहली बार बिना बीच में टोके विद्वान की बात सुनने लगा।

सीख: सच्चा ज्ञान पाने के लिए विनम्रता जरूरी है। जो सुनना सीखता है, वही वास्तव में सीखता है।


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ