एक गाँव में एक बूढ़ा आदमी रात को अपने घर के बाहर दीपक जलाता था। उसके पास से गुजरने वाले लोग उस रोशनी में रास्ता देख लेते।
एक रात तेज हवा चलने लगी। दीपक की लौ बार-बार काँपने लगी।
बूढ़े ने अपने पोते से कहा, “शीशे का एक छोटा-सा घेरा ले आओ।”
पोता शीशा ले आया। बूढ़े ने दीपक के चारों ओर उसे लगा दिया।
अब हवा चलती रही, लेकिन दीपक की लौ सुरक्षित रही।
पोते ने पूछा, “दादा, हवा को रोकना जरूरी था?”
बूढ़े ने कहा, “नहीं। हवा को रोकना हमारे हाथ में नहीं। लेकिन दीपक की रक्षा करना हमारे हाथ में था।”
पोते ने पूछा, “इंसान की जिंदगी में भी ऐसा होता है?”
बूढ़े ने कहा, “बिल्कुल। दुनिया में हर तरह की बातें होंगी। कोई तुम्हारी तारीफ करेगा, कोई आलोचना। कोई तुम्हें सही रास्ते से हटाने की कोशिश करेगा। तुम हर हवा को रोक नहीं सकते, लेकिन अपने दिल की लौ की हिफाजत कर सकते हो।”
“कैसे?”
“अच्छी संगत, सही ज्ञान, सब्र और अपने उद्देश्य को याद रखकर।”
पोते ने दीपक को देखा। बाहर हवा तेज थी, मगर अंदर उसकी रोशनी शांत थी।
सीख: दुनिया की हर परेशानी को रोकना हमारे हाथ में नहीं, लेकिन अपने चरित्र, ईमान और अच्छे उद्देश्य की रक्षा करना हमारे हाथ में है।

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