गोरखपुर। हजरत शैख अब्दुल कादिर जीलानी अलैहिर्रहमा (गौसे आजम) की याद में गुरुवार को शहर के विभिन्न इलाकों में ग्यारहवीं शरीफ अकीदत और एहतराम के साथ मनाई गई। इस मौके पर मस्जिदों, मदरसों और घरों में फातिहा ख्वानी का आयोजन किया गया। सुबह फज्र की नमाज के बाद शुरू हुआ फातिहा ख्वानी और दुआओं का सिलसिला देर तक जारी रहा। विभिन्न स्थानों पर महफिल-ए-गौसुलवरा का आयोजन कर हजरत गौसे आजम की जिंदगी, उनकी दीनी खिदमात, शिक्षाओं और नेक किरदार को याद किया गया।
महफिलों में उलमा और वक्ताओं ने हजरत शैख अब्दुल कादिर जीलानी अलैहिर्रहमा की शिक्षाओं पर रोशनी डालते हुए कहा कि उनकी जिंदगी इंसान को ईमान, इबादत, अच्छे अखलाक, नेक अमल, इंसानियत और जरूरतमंदों की मदद का पैगाम देती है। अकीदतमंदों ने फातिहा ख्वानी में हिस्सा लिया और देश में अमन-ओ-आमान, खुशहाली तथा आपसी भाईचारे के लिए दुआ की। कई स्थानों पर अकीदतमंदों के बीच शीरीनी बांटी गई, जबकि कुछ जगहों पर लंगर का भी इंतजाम किया गया।
तुर्कमानपुर और तिवारीपुर में हुई महफिल-ए-गौसे आजम
तुर्कमानपुर और तिवारीपुर में आयोजित महफिल-ए-गौसे आजम में कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने हजरत शैख अब्दुल कादिर जीलानी अलैहिर्रहमा की जिंदगी और उनकी शिक्षाओं पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि हजरत गौसे आजम अल्लाह के महान वलियों में से हैं। उनकी जिंदगी में तौहीद, सुन्नत-ए-नबी और नेक आचरण का महत्वपूर्ण संदेश मिलता है।
उन्होंने कहा कि हमारे औलिया-ए-किराम और मशायख जिन रास्तों से गुजरे, वहां तौहीद और सुन्नत-ए-नबी का नूर और खुशबू फैलती गई। इन बुजुर्गों ने अपने किरदार और अमल से लोगों को दीन, नेकियों और इंसानियत की ओर प्रेरित किया। उनकी जिंदगी से हमें यह सीख मिलती है कि इंसान केवल अपनी इबादत तक सीमित न रहे, बल्कि अपने अच्छे व्यवहार और किरदार से समाज के दूसरे लोगों के लिए भी भलाई का जरिया बने।
कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि हिन्दुस्तान में दीन-ए-इस्लाम के प्रचार-प्रसार में औलिया-ए-किराम और सूफिया-ए-किराम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने मोहब्बत, इंसानियत, भाईचारे और नेक किरदार के जरिए लोगों के दिलों को प्रभावित किया। उनके जीवन और शिक्षाओं से आज भी समाज को सकारात्मक दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि हमें बुजुर्गों की शिक्षाओं को केवल महफिलों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में भी नेक अमल, अच्छे अखलाक और सुन्नत पर अमल की कोशिश करनी चाहिए।
सब्जपोश हाउस मस्जिद में भी हुआ आयोजन
सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में ग्यारहवीं शरीफ के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां हाफिज रहमत अली निजामी ने हजरत शैख अब्दुल कादिर जीलानी अलैहिर्रहमा की शिक्षाओं और उनके जीवन से मिलने वाले संदेशों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि गौसे आजम की शिक्षाओं में इंसान के लिए ईमान, इबादत, अच्छे अखलाक और इंसानियत का महत्वपूर्ण संदेश मौजूद है। औलिया-ए-किराम की जिंदगी हमें अपने किरदार को बेहतर बनाने और समाज में मोहब्बत व भाईचारा कायम करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि आज समाज में आपसी सौहार्द और इंसानी रिश्तों को मजबूत करने की जरूरत है। ऐसे में बुजुर्गों की जिंदगी और उनकी शिक्षाएं लोगों को नेक रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती हैं।
उन्होंने कहा कि इंसान अपने व्यवहार और किरदार में सुधार लाकर परिवार और समाज दोनों के लिए बेहतर माहौल पैदा कर सकता है। जरूरतमंदों की मदद, कमजोरों का सहारा बनना, पड़ोसियों के साथ अच्छा व्यवहार करना और लोगों के साथ मोहब्बत से पेश आना भी नेक जिंदगी का हिस्सा है।
कुल शरीफ के बाद हुई विशेष दुआ
महफिल के अंत में कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इसके बाद मुल्क और मिल्लत की तरक्की, अमन-ओ-आमान, आपसी भाईचारे, खुशहाली और लोगों की सलामती के लिए विशेष दुआ की गई। बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने दुआ में शामिल होकर अपने और अपने परिवार के लिए भी खैर और बरकत की दुआ मांगी।
दुआ के बाद अकीदतमंदों के बीच शीरीनी वितरित की गई। कई स्थानों पर लोगों के लिए लंगर का भी इंतजाम किया गया। बच्चों, बुजुर्गों और युवाओं ने भी आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।





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