गोरखपुर। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा बच्चों और युवाओं में धार्मिक, नैतिक एवं शैक्षिक जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से रविवार को मियां साहब इस्लामिया (एमएसआई) इंटर कॉलेज, बक्शीपुर के ऑडिटोरियम में सीरतुन्नबी ﷺ सेमिनार एवं सीरतुन्नबी ﷺ कॉम्पिटिशन सीजन-2 का पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम अल कलम ट्रस्ट व तहरीक उलमा-ए-हिंद की ओर से आयोजित किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में उलमा, शिक्षाविद, अभिभावक, छात्र-छात्राएं और शहर के लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान सीरतुन्नबी ﷺ कॉम्पिटिशन के सफल प्रतिभागियों को ट्राफी, शील्ड और पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। कॉलेज ग्रुप में नगमा खातून ने प्रथम स्थान हासिल कर सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-2 की विजेता बनने का गौरव प्राप्त किया। उन्हें ट्रैवल प्वाइंट हज उमराह व जियारत की ओर से फ्री उमराह पैकेज का विशेष पुरस्कार और ट्राफी प्रदान की गई।
कॉम्पिटिशन के सफरनामे की प्रस्तुति
समारोह में सीरतुन्नबी ﷺ कॉम्पिटिशन और अल कलम ट्रस्ट की गतिविधियों पर सफरनामा प्रस्तुत किया गया। कॉम्पिटिशन के विभिन्न चरणों, प्रतिभागियों की गतिविधियों और कार्यक्रम से जुड़े प्रयासों को वीडियो तथा अन्य माध्यमों से लोगों के सामने रखा गया। बच्चों द्वारा लिखी गई कॉम्पिटिशन की कॉपियां भी प्रदर्शित की गईं। इससे अभिभावकों और उपस्थित लोगों को प्रतिभागियों की मेहनत, अध्ययन और सीरत के प्रति उनकी रुचि को करीब से देखने का अवसर मिला।
आयोजकों ने बताया कि सीरतुन्नबी ﷺ कॉम्पिटिशन का उद्देश्य केवल बच्चों को पुरस्कार दिलाना नहीं था, बल्कि उन्हें सीरत-ए-पाक के अध्ययन से जोड़ना, पढ़ने-लिखने की आदत विकसित करना और धार्मिक एवं नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करना भी था।
कलमा शरीफ पढ़ने की मुहिम शुरू
समारोह के दौरान कलमा शरीफ पढ़ने की एक विशेष मुहिम भी शुरू की गई। आयोजकों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य लोगों को कलमा शरीफ पढ़ने की तरफ प्रेरित करना और धार्मिक जागरूकता को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों से मुहिम से जुड़ने तथा इसका संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की अपील की गई।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि सीरतुन्नबी ﷺ से जुड़े कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल कॉम्पिटिशन और पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं है। इसका मकसद लोगों को पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं, धार्मिक मूल्यों और नेक अमल से जोड़ना भी है। इसी क्रम में कलमा शरीफ पढ़ने की मुहिम को कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया।
सीरतुन्नबी ﷺ, कुरआन और साइंस के तालमेल पर डॉ. मुफ्ती खालिद का व्याख्यान
मुख्य अतिथि तहरीक उलमा-ए-हिंद के चेयरमैन डॉ. मुफ्ती मुहम्मद खालिद अय्यूब मिस्बाही ने सीरतुन्नबी ﷺ, कुरआन और साइंस के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखते हुए ज्ञान की अहमियत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कुरआन इंसान को ज्ञान हासिल करने, कायनात पर गौर-ओ-फिक्र करने और सृष्टि में मौजूद निशानियों पर विचार करने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि विज्ञान प्राकृतिक घटनाओं और कायनात के विभिन्न पहलुओं को समझने का माध्यम है, जबकि धार्मिक शिक्षा इंसान को ज्ञान के सही इस्तेमाल के लिए नैतिक दिशा प्रदान करती है। उन्होंने बच्चों और युवाओं को सीरत के अध्ययन के साथ शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया।
डॉ. मुफ्ती खालिद अय्यूब मिस्बाही ने अल कलम ट्रस्ट की ओर से आयोजित सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन और इससे जुड़ी विभिन्न पहलों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों में पढ़ने, लिखने और सीखने की रुचि पैदा होती है तथा उन्हें पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी और शिक्षाओं को समझने का अवसर मिलता है।
उन्होंने बच्चों में किताब पढ़ने, सवाल करने, खोज करने और नई चीजें सीखने की आदत विकसित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक शिक्षा और आधुनिक शिक्षा के बीच संतुलन कायम करके समाज के लिए बेहतर भविष्य तैयार किया जा सकता है।
सीरतुन्नबी ﷺ से मिलता है जीवन का व्यापक मार्गदर्शन : डॉक्टर गौस मुहम्मद
विशिष्ट वक्ता हैदराबाद यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गौस मुहम्मद अजहरी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत मानव जीवन के लिए व्यापक मार्गदर्शन का स्रोत है। सीरत का अध्ययन केवल प्रतियोगिता में सफलता हासिल करने या जानकारी बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे इंसान को अपने जीवन, व्यवहार और समाज के प्रति जिम्मेदारियों को समझने की प्रेरणा लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बच्चों को बचपन से ही सीरत, कुरआन और अच्छे अखलाक से जोड़ने की जरूरत है। नई पीढ़ी अगर पैगंबर-ए-इस्लाम की जिंदगी का अध्ययन करेगी तो उसे सच्चाई, अमानतदारी, इंसाफ, सब्र, रहमदिली और इंसानियत जैसे गुणों को अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा हासिल करने पर भी जोर दिया।
दो करोड़ 39 लाख 58 हजार 838 दुरूद शरीफ पेश
समारोह में सीरतुन्नबी ﷺ कॉम्पिटिशन से जुड़े एक विशेष पहलू का भी उल्लेख किया गया। बताया गया कि कॉम्पिटिशन और इससे जुड़े प्रयासों के दौरान दो करोड़ 39 लाख 58 हजार 838 दुरूद शरीफ पढ़कर पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बारगाह में पेश किया गया।
हाफिज रहमत अली निजामी और मुजफ्फर हसनैन रूमी ने बताया कि कॉम्पिटिशन का उद्देश्य बच्चों को केवल पुरस्कार दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें सीरत-ए-पाक के अध्ययन से जोड़ना और उनके अंदर पढ़ने-लिखने की रुचि पैदा करना भी था। इसमें विभिन्न आयु और शैक्षिक वर्गों के बच्चों के साथ बड़ों ने भी हिस्सा लिया।
विभिन्न वर्गों के प्रतिभागियों को मिला सम्मान
हिफ्ज ग्रुप में इकरा अंसारी, सलमान अंसारी, मुहम्मद शाद, मुहम्मद साकिब अंसारी और रहमत अली ने पुरस्कार हासिल किए। आलिम ग्रुप में रौनक फातिमा, मुहम्मद कासिम, सदफ हया, सानिया बानो और ऐनुन जारिया सफल रहे।
स्कूल ग्रुप में इनाया फातिमा, यसरा खान, यास्ना साकिब, उजमा नूर और सुमैरा वारसी को पुरस्कार मिला। कॉलेज ग्रुप में नगमा खातून, फौजिया तबस्सुम, मरियम शाहीन, सदफ फातिमा और शारीबा कौसर कामयाब रहीं। इसी ग्रुप में नगमा खातून ने प्रथम स्थान हासिल कर प्रतियोगिता की विजेता बनने के साथ फ्री उमराह पैकेज का विशेष पुरस्कार प्राप्त किया।
फ्री ग्रुप में करीमा हुसैन, सद्दाम हुसैन निजामी, आहू चश्म निजामी, मेहनाज जहां और सोफिया खातून को पुरस्कार प्रदान किया गया।
तिलावत से हुआ कार्यक्रम का आगाज
कार्यक्रम की शुरुआत हाफिज रहमत अली निजामी की कुरआन-ए-पाक की तिलावत से हुई। इसके बाद हम्द-ओ-नात पेश की गई। कार्यक्रम का संचालन कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने किया। उन्होंने सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन के उद्देश्य और इसके सफर पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चों को सीरत-ए-पाक से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण जरूरत है। कॉम्पिटिशन के माध्यम से बच्चों में अध्ययन, लेखन और सीरत के प्रति रुचि पैदा करने का प्रयास किया गया है।
अतिथियों का स्वागत हाफिज रहमत अली निजामी, मुजफ्फर हसनैन रूमी, आसिफ महमूद और नेहाल अहमद ने किया।
समारोह में प्रधानाचार्य मुख्तार अहमद, प्रधानाचार्या शम्सा अंसारी, अरबाज नक्शबंदी, मुफ्ती अख्तर हुसैन, मुफ्ती अजहर शम्सी, हाजी फैज अहमद खान, शहबाज सिद्दीकी, सैयद जव्वाद अली सब्जपोश, महबूब आलम, कारी शराफत हुसैन, हाफिज आफताब आलम, हाफिज रजी, मौलाना महमूद रजा, मौलाना जहांगीर अहमद, ताबिश सिद्दीकी, शीराज सिद्दीकी, मुहम्मद आजम, नवेद आलम, शादाब सिद्दीकी, सैयद नदीम अहमद, शीरीन आसिफ, ज्या वारसी, आयशा फसीही, आयशा खातून, आस्मां खातून, अली अहमद, समीर अली, जैद, हाजी सेराज अहमद, सैयद जफर हसन, प्रधानाचार्य कारी नसीमुल्लाह, मुफ्तिया कहकशां फिरदौस, सेराज अहमद कुरैशी, आलिमा अरबिया इस्माईली, मौलाना दानिश, प्रधानाचार्य मुहम्मद सिद्दीक, एडवोकेट मुहम्मद आजम, काशिफ महमूद, सैयद आसिम, आसिफ अंसारी, रहमत अली, रुशान, शाद, जीशान, बेलाल अहमद, सैयद शहाबुद्दीन आदि मौजूद रहे।
आयोजकों ने कहा कि सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत से जोड़ने के साथ उनमें अध्ययन, लेखन और ज्ञान की रुचि पैदा करना है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे, ताकि नई पीढ़ी सीरत, कुरआन, शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़कर समाज के लिए सकारात्मक योगदान दे सके।





















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