इल्म हासिल करो, किरदार संवारो और नई नस्ल की बेहतर तरबियत करो : डॉ. खालिद मिस्बाही

गोरखपुर के विभिन्न इलाकों में एक दिवसीय दौरा, मदरसे के छात्रों, इस्लामी बहनों और आम लोगों से की मुलाकात; शिक्षा, अच्छे अखलाक, औलिया किराम की मुहब्बत और समाज सुधार पर दिया जोर

गोरखपुर। तहरीक उलमा-ए-हिंद राजस्थान के चेयरमैन डॉ. मुफ्ती मुहम्मद खालिद अय्यूब मिस्बाही ने अपने एक दिवसीय गोरखपुर दौरे के दौरान शहर के विभिन्न इलाकों का दौरा कर लोगों को इल्म, अमल, अच्छी तरबियत, धार्मिक जागरूकता, नेक किरदार और समाज सुधार का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने पुराना गोरखपुर गोरखनाथ, हुमायूंपुर उत्तरी, खोखर टोला और निजामपुर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत की। उन्होंने मदरसे के छात्रों, इस्लामी बहनों और आम लोगों से मुलाकात कर मौजूदा दौर में शिक्षा और नैतिक मूल्यों की अहमियत पर विस्तार से रोशनी डाली।


डॉ. खालिद मिस्बाही ने अपने संबोधनों में कहा कि किसी भी समाज की तरक्की केवल आधुनिक सुविधाओं या आर्थिक विकास से नहीं होती, बल्कि इसके लिए इल्म के साथ अच्छे अखलाक, बेहतर किरदार और जिम्मेदार नागरिकों की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की सही दिशा में तरबियत आज की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। अगर बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार और नैतिक मूल्यों से जोड़ा जाए तो वे आगे चलकर परिवार, समाज और देश के लिए बेहतर भूमिका निभा सकते हैं।

मदरसे के छात्रों को मेहनत, लगन और अनुशासन की नसीहत

दौरे के दौरान डॉ. खालिद मिस्बाही ने मदरसा जियाउल उलूम, पुराना गोरखपुर गोरखनाथ पहुंचकर छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनकी शैक्षणिक गतिविधियों के संबंध में रहनुमाई करते हुए मेहनत, लगन और अनुशासन के साथ शिक्षा हासिल करने की नसीहत की।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन इंसान की जिंदगी का बेहद महत्वपूर्ण दौर होता है। इसी समय हासिल किया गया इल्म और विकसित की गई आदतें भविष्य की दिशा तय करती हैं। इसलिए छात्रों को अपने समय की कद्र करनी चाहिए और पढ़ाई के साथ अपने व्यवहार तथा किरदार को बेहतर बनाने पर भी ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अपने शिक्षकों और बड़ों का सम्मान करें, नियमित रूप से पढ़ाई करें और जो कुछ सीखें उसे अपनी जिंदगी में उतारने की कोशिश करें। उन्होंने कहा कि केवल किताबें पढ़ लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इल्म का असली मकसद इंसान के विचार, व्यवहार और किरदार में सकारात्मक बदलाव पैदा करना है।

डॉ. खालिद मिस्बाही ने छात्रों को मेहनत और निरंतर प्रयास की अहमियत बताते हुए कहा कि सफलता के लिए लगन, धैर्य और अनुशासन जरूरी है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने लक्ष्य को तय करें और उसे हासिल करने के लिए लगातार मेहनत करते रहें।

बच्चों की बेहतर तरबियत पर इस्लामी बहनों को किया जागरूक

इसके बाद हुमायूंपुर उत्तरी में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. खालिद मिस्बाही ने इस्लामी बहनों को संबोधित किया। उन्होंने बच्चों की बेहतर तरबियत को परिवार और समाज की मजबूती का आधार बताते हुए कहा कि बच्चे की पहली तालीम और तरबियत घर से ही शुरू होती है।

उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चों के लिए सबसे पहली मिसाल होते हैं। बच्चे अपने घर के माहौल, बड़ों के व्यवहार और रोजमर्रा की आदतों से बहुत कुछ सीखते हैं। इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की पढ़ाई के साथ उनके अखलाक, आदाब, संस्कार और जिम्मेदारियों पर भी विशेष ध्यान दें।

उन्होंने इस्लामी बहनों से अपील की कि बच्चों को समय दें, उनकी बात सुनें और उनकी गतिविधियों पर सकारात्मक नजर रखें। उन्हें ऐसा माहौल दिया जाए, जिसमें वे शिक्षा के साथ धार्मिक और नैतिक मूल्यों को भी अपनी जिंदगी का हिस्सा बना सकें।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के सामने आज कई तरह की चुनौतियां हैं। ऐसे में केवल बच्चों को डांटने या रोकने के बजाय उन्हें सही और गलत के बीच फर्क समझाना जरूरी है। परिवार में प्यार, अनुशासन और अच्छी बातचीत का माहौल कायम करके बच्चों की सोच और व्यक्तित्व को बेहतर दिशा दी जा सकती है।

घर-घर महफिल-ए-मिलाद में शुक्र और इंसानियत का पैगाम

गोरखपुर के खोखर टोला में घर-घर आयोजित महफिल-ए-मिलाद के सिलसिले में भी डॉ. खालिद मिस्बाही ने लोगों से मुलाकात की और उन्हें संबोधित किया। उन्होंने अल्लाह तआला की नेमतों पर शुक्र अदा करने और अपनी जिंदगी को नेक कामों से जोड़ने की ताकीद की।

उन्होंने कहा कि इंसान को अपनी जिंदगी में केवल अपनी जरूरतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए भी आगे आना चाहिए। आपसी प्रेम, भाईचारा, हमदर्दी और इंसानियत समाज को मजबूत बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि धार्मिक कार्यक्रमों का मकसद केवल एकत्र होना नहीं, बल्कि उनसे मिलने वाले पैगाम को अपनी जिंदगी में उतारना भी है। अगर धार्मिक और सामाजिक आयोजनों से लोगों में अच्छाई, भाईचारा, जरूरतमंदों की मदद और समाज की भलाई का जज्बा पैदा हो तो ऐसे कार्यक्रम समाज के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं।

उन्होंने लोगों से आपसी मतभेदों को कम करने, एक-दूसरे का सम्मान करने और समाज में सकारात्मक माहौल कायम करने की अपील की।

जलसा-ए-गौसुलवरा में औलिया किराम की मुहब्बत पर रोशनी

दौरे के अंतिम चरण में निजामपुर में आयोजित जलसा-ए-गौसुलवरा में डॉ. मुफ्ती मुहम्मद खालिद अय्यूब मिस्बाही ने औलिया किराम की मुहब्बत और उनकी शिक्षाओं के महत्व पर विस्तार से तकरीर की।

उन्होंने कहा कि औलिया किराम ने अपने इल्म, अमल, इबादत और बेहतर किरदार के जरिए समाज को भलाई और नेक रास्ते की ओर रहनुमाई की। उनकी जिंदगी लोगों के लिए अच्छे अखलाक, इंसानियत, सेवा और नेकी का संदेश देती है। जरूरत इस बात की है कि औलिया किराम से मुहब्बत के साथ उनकी शिक्षाओं और अच्छे किरदार को अपनी जिंदगी में अपनाया जाए।


उन्होंने कहा कि समाज में धार्मिक और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए नई पीढ़ी को अपने बुजुर्गों, उलमा और नेक लोगों की जिंदगी से सीखने का अवसर देना चाहिए। बच्चों और युवाओं को अच्छी संगत, अच्छी शिक्षा और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण जरूरत है।

डॉ. खालिद मिस्बाही ने समाज में बढ़ती चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि समाज सुधार किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए परिवार, शिक्षक, उलमा-ए-किराम, सामाजिक कार्यकर्ताओं और समाज के जिम्मेदार लोगों को मिलकर काम करना होगा।

शिक्षा और तरबियत से ही मजबूत होगा समाज

अपने विभिन्न संबोधनों में डॉ. खालिद मिस्बाही ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि समाज की वास्तविक तरक्की शिक्षा और अच्छी तरबियत के मेल से संभव है। उन्होंने कहा कि केवल डिग्री हासिल करना ही शिक्षा का अंतिम उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि शिक्षा के साथ इंसान में जिम्मेदारी, ईमानदारी, अनुशासन, दूसरों के सम्मान और समाज के प्रति सेवा की भावना भी पैदा होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को अगर सही समय पर सही दिशा दी जाए तो वे समाज की बड़ी ताकत बन सकते हैं। वहीं, अगर उनकी तरबियत और मार्गदर्शन पर ध्यान न दिया जाए तो वे गलत दिशा में भी जा सकते हैं। इसलिए अभिभावकों और शिक्षकों को अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से समझना होगा।

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों में शिक्षा और अच्छे माहौल को बढ़ावा दें, बच्चों को अच्छे संस्कार दें और उन्हें समाज की भलाई के कामों से जोड़ें। उन्होंने कहा कि मजबूत परिवार ही मजबूत समाज की बुनियाद होता है।

डॉ. खालिद मिस्बाही का यह एक दिवसीय दौरा इल्म, अमल, अच्छे अखलाक, बच्चों की बेहतर तरबियत, औलिया किराम की मुहब्बत और समाज सुधार के विभिन्न पहलुओं पर महत्वपूर्ण संदेशों के लिए खास रहा। उनके संबोधनों में शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण और नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देने पर विशेष जोर रहा।

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