विचार गोष्ठी का विषय “क्रांतिकारियों का हक और अधिकार तथा हम नागरिकों की जिम्मेदारी” रहा। वक्ताओं ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में सरदार अली खान और उनके परिवार के बलिदान को याद करते हुए उनके बलिदान स्थल को संरक्षित कर स्मारक बनाने की मांग उठाई।
हिंदू-मुस्लिम एकता कमेटी के अध्यक्ष शाकिर अली सलमानी ने कहा कि क्रांतिकारी शहीद सरदार अली खान हम सबके हैं और हम उनके हैं। देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले क्रांतिकारी शहीदों को किसी जाति या धर्म के बंधन में नहीं बांधा जा सकता। उनकी शहादत अमर है और उनकी गाथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी। उन्होंने कहा कि कोतवाली परिसर स्थित 1857 के इस ऐतिहासिक बलिदान स्थल को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाना चाहिए। स्थल की बाउंड्री, साफ-सफाई और सुंदरीकरण के लिए जिलाधिकारी एवं नगर निगम की ओर से आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
इतिहासकार डॉ. कृष्ण कुमार पांडे ने कहा कि 1857 में अपना घर-बार और सब कुछ लुटाकर देश के लिए बलिदान देने वाले अमर शहीद सरदार अली खान को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब उनके बलिदान स्थल को संरक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन को स्थल की बाउंड्री वॉल कराकर वहां की गंदगी हटानी चाहिए और इसके संरक्षण व सुंदरीकरण के लिए विशेष बजट उपलब्ध कराना चाहिए।
समाजसेवी अकरम खान ने कोतवाली परिसर स्थित बलिदान स्थल की दुर्दशा पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक स्थल पर गंदगी, कूड़े की ट्रालियां और कबाड़ की गाड़ियां खड़ी होना दुर्भाग्यपूर्ण है। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर इस स्थल की विशेष साफ-सफाई और सजावट होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उच्च अधिकारियों को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
कार्यक्रम में अमर शहीद सरदार अली खान के पांचवें वंशज मुख्तार अली खान ने कहा कि वह दिन देखने की इच्छा है जब उनके पूर्वज के बलिदान स्थल का विधिवत सुंदरीकरण और संरक्षण हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि शासन और प्रशासन जल्द ही इस ऐतिहासिक स्थल के विकास की मांग को पूरा करेगा।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से सिराज खान, प्रकाश सिंह, अरशद अली खान, खुर्शीद खान, सोहराब खान, अकरम खान, नसरुद्दीन अली, अफजल अली खान और अयान अली खान सहित अन्य लोग मौजूद रहे। सभी ने शहीद सरदार अली खान के बलिदान को नमन करते हुए उनके स्मृति स्थल के संरक्षण और सुंदरीकरण के लिए सामूहिक प्रयास का संकल्प लिया।


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