जालना, महाराष्ट्र। इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के तत्वावधान में मातोश्री लॉन्स, अंबड रोड जालना में नौवें अंतरराष्ट्रीय पत्रकार सम्मान एवं सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों के साथ महाराष्ट्र के सभी जिलों से बड़ी संख्या में पत्रकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम में पत्रकार हित, सुरक्षा, अधिकार, उत्पीड़न, संगठन की शक्ति और पत्रकारिता की भावी कार्ययोजना को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इसके बाद मंचासीन अतिथियों का शाल, बुके, स्मृतिपत्र एवं स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया गया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता एवं वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक अशोक वानखेड़े ने कहा कि पत्रकारिता केवल समाचार लिखने का कार्य नहीं, बल्कि समाज की पीड़ा को आवाज देने और लोकतंत्र की रक्षा करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। पत्रकार सुबह से देर रात तक समाज के बीच रहकर खबरें जुटाता है। कभी वह पीड़ित परिवार के आंसुओं को सामने लाता है, तो कभी गरीब और वंचित लोगों की समस्याओं को अपनी खबर के माध्यम से शासन-प्रशासन तक पहुंचाता है। भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ सवाल उठाना भी पत्रकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि इस जिम्मेदारी को निभाते हुए पत्रकार कई बार अपना सुख-चैन, समय और यहां तक कि अपनी सुरक्षा भी दांव पर लगा देता है। इसलिए पत्रकार को केवल सम्मान-पत्र और स्मृति चिह्न देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे ऐसा वातावरण भी मिलना चाहिए, जहां वह बिना किसी भय और दबाव के अपनी कलम चला सके।
अशोक वानखेड़े ने कहा कि पत्रकारिता का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। प्रिंट मीडिया के साथ डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया और स्वतंत्र पत्रकारिता का विस्तार हुआ है। इससे पत्रकारों के सामने नए अवसर आए हैं, लेकिन चुनौतियां भी बढ़ी हैं। तेजी से खबर देने की होड़ में तथ्यों की पुष्टि और विश्वसनीयता बनाए रखना बड़ी चुनौती है। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि किसी भी खबर को प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले उसके तथ्यों की पूरी तरह पुष्टि करें और पत्रकारिता की विश्वसनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
उन्होंने इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि देश-विदेश तथा महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से पत्रकारों का एक मंच पर एकत्र होना पत्रकार एकता का महत्वपूर्ण संदेश है।
अकरम रईस खान ने कहा कि पत्रकार दूसरों की समस्याओं पर सवाल उठाता है, लेकिन आज जरूरत इस बात की है कि पत्रकारों की अपनी समस्याओं पर भी गंभीरता से सवाल उठाए जाएं। जब कोई गरीब या पीड़ित अपनी आवाज उठाने में असमर्थ होता है तो पत्रकार उसके लिए आवाज बनता है। ऐसे में जब पत्रकार स्वयं धमकी, उत्पीड़न, दबाव या भय का सामना करे तो उसके साथ खड़ा होना पूरे पत्रकार समाज की जिम्मेदारी है।
जालना जिलाधिकारी अशिमा मित्तल ने कहा कि पत्रकार समाज का सजग प्रहरी है, जो दिन-रात समाज की समस्याओं को सामने लाने और शासन-प्रशासन तक जनता की आवाज पहुंचाने का काम करता है। प्रशासन और पत्रकारों के बीच बेहतर संवाद लोकतंत्र को और मजबूत बनाता है। पत्रकार शासन-प्रशासन की कमियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हैं, जिससे प्रशासन को व्यवस्था में सुधार का अवसर मिलता है। इसलिए पत्रकार और प्रशासन एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि जनहित के व्यापक उद्देश्य में सहयोगी की भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि तेज प्रतिस्पर्धा, बदलता मीडिया परिदृश्य, डिजिटल मीडिया का बढ़ता प्रभाव, आर्थिक चुनौतियां और समाचारों की विश्वसनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी आज पत्रकारों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व विधायक कैलाश गोरंटियाल ने कहा कि पत्रकार की कलम में समाज को बदलने की ताकत होती है। उस कलम को सम्मान, स्वतंत्रता और सुरक्षा मिलना आवश्यक है। जब पत्रकार निर्भय होकर जनता की आवाज उठाएगा और प्रशासन उस आवाज को संवेदनशीलता से सुनेगा, तभी लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा। उन्होंने सम्मेलन की सफलता के लिए इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पत्रकारों के हित और सम्मान के लिए आयोजित ऐसे कार्यक्रम पत्रकारिता जगत में नई ऊर्जा और सकारात्मक संवाद पैदा करते हैं।
इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी ने कहा कि यदि किसी पत्रकार को सच लिखने के कारण डरना पड़े, खबर प्रकाशित करने से पहले किसी दबाव की चिंता करनी पड़े या अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर आशंकित रहना पड़े तो यह केवल पत्रकार की समस्या नहीं, बल्कि लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि पत्रकार का वास्तविक सम्मान उसके काम की स्वतंत्रता, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा से होता है। पत्रकार को सम्मान-पत्र और माला के साथ ऐसा वातावरण भी चाहिए, जहां वह बिना भय के अपनी कलम चला सके। पत्रकार की आवाज को गंभीरता से सुना जाए और उसके साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ समाज तथा प्रशासन खड़ा हो, तभी सम्मान की सार्थकता है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों की सबसे बड़ी ताकत उनकी एकता है। यदि पत्रकार अलग-अलग होकर अपनी समस्याएं उठाएंगे तो उनकी आवाज कमजोर पड़ सकती है, लेकिन हजारों पत्रकार लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से एकजुट होकर अपनी बात रखते हैं तो उनकी आवाज को मजबूती मिलती है। संगठन की शक्ति का इस्तेमाल किसी व्यक्ति या संस्था के विरोध के लिए नहीं, बल्कि पत्रकारों के अधिकार, सुरक्षा, सम्मान और पत्रकारिता की गरिमा की रक्षा के लिए होना चाहिए।
सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों के 24 प्रतिभावान व्यक्तियों तथा करीब 500 पत्रकारों को स्मृतिपत्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। देश-विदेश तथा महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से आए पत्रकारों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। पत्रकारों ने अपने अधिकारों, सुरक्षा, सम्मान और भविष्य को लेकर एकजुटता प्रदर्शित की।
इस अवसर पर नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार इश्तियाक अहमद व मेवालाल यादव, राष्ट्रीय सचिव सलमान अहमद प्रयागराज व मसूद जावेद कादरी खंडवा मध्य प्रदेश, राष्ट्रीय काउंसिल सदस्य मो. एजाजुल हक, भुवनेश्वर उड़ीसा, प्रोफेसर विजय कांबले, अण्णा भाऊ, इब्राहिम पाशा, मिथिलेश कुमार प्रदेश अध्यक्ष बिहार, अशरफ आरिफ प्रदेश अध्यक्ष मध्य प्रदेश, मो. कलाम कुरैशी प्रदेश अध्यक्ष बुंदेलखंड, अरुण बंका, मनीष कमलिया, रफीक तिगाला, नेहाल अहमद, मोहम्मद ताबिश प्रदेश अध्यक्ष मराठवाड़ा, प्रदेश उपाध्यक्ष जावेद खान, प्रदेश संगठन सचिव सैय्यद अनवर कादरी, कार्यक्रम संयोजक एवं जिला अध्यक्ष आमेर खान, सुनील भारती, शेख मुजीबुद्दीन, शेख सलीम, बाशित बेग, सैय्यद निसार, अनिल खडसे, देवीदास खरात, राजू कार्डिले, शकील खान, सलीम कुरैशी, महजबीन अंजुम, निकिता काले, मनीषा मगरे, हाफिज अहमद, सुबोध प्रसाद सिंह, गोपाल साहनी, सुनील कुमार, सैय्यद जाकिर, राहुल शेंडे सहित हजारों पत्रकार मौजूद रहे।
सम्मेलन में पत्रकारों के सम्मान के साथ उनकी सुरक्षा, स्वतंत्रता, अधिकार और सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया गया कि पत्रकार सुरक्षित और निर्भय रहेगा, तभी उसकी कलम लोकतंत्र की आवाज को मजबूती से बुलंद कर सकेगी।



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