मुहर्रम-हराम के दसों दिन खुसूसन आशूरह के दिन मजलिस मुनअकिद करना और सही रिवायतों के साथ हजरत सैयदना इमाम हुसैन व शुहदाए करबला के फजाइल और वाकियाते करबला बयान करना जायज व बाइसे सवाब है। जिस मजलिस में सालिहीन का जिक्र हो, वहां रहमत का नुजूल होता है।
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू। मैं सैयद फ़रहान अहमद हूँ। इस ब्लॉग के माध्यम से इस्लामी जानकारी, सीरतुन्नबी ﷺ, कुरआन व हदीस की शिक्षाएँ, इतिहास, शिक्षा तथा सामाजिक विषयों पर प्रमाणिक और उपयोगी लेख साझा करता हूँ। हमारा उद्देश्य ज्ञान को सरल भाषा में अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना है।
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