रिकॉर्डेड संदेश, ड्रोन निगरानी और पर्चों से जागरूकता, चीनी मांझे के खिलाफ राजघाट पुलिस का अभियान


रिपोर्ट: रशाद लारी

गोरखपुर। चीनी मांझे से होने वाले हादसों पर अंकुश लगाने के लिए राजघाट पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया। सीओ कोतवाली ओंकार दत्त तिवारी के नेतृत्व और थानाध्यक्ष राजघाट गौरव वर्मा की मौजूदगी में पुलिस टीम ने बाजारों, चौराहों और विभिन्न मोहल्लों में पैदल मार्च कर प्रतिबंधित चीनी मांझे के इस्तेमाल और बिक्री के खिलाफ लोगों को सचेत किया।

अभियान के दौरान पुलिस वाहन से लगातार रिकॉर्डेड जागरूकता संदेश प्रसारित किया गया। संदेश के माध्यम से लोगों को चीनी मांझे को जानलेवा बताते हुए इसके इस्तेमाल से बचने की अपील की गई। साथ ही लोगों से प्रतिबंधित मांझे की बिक्री या इस्तेमाल की जानकारी तत्काल पुलिस को देने को कहा गया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि चीनी मांझे की बिक्री कानूनी अपराध है और सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।

ड्रोन से हुई निगरानी, पतंग दुकानों की जांच

अभियान के दौरान पुलिस ने ड्रोन कैमरे के माध्यम से भी क्षेत्र में निगरानी की। टीम ने पतंग और मांझे की दुकानों पर पहुंचकर विभिन्न प्रकार के मांझों की जांच की और कई जगह मांझे के पैकेट खोलकर भी देखे। हालांकि, जांच के दौरान किसी दुकान से प्रतिबंधित चीनी मांझा बरामद नहीं हुआ।

पुलिस टीम ने दुकानदारों को जागरूकता संबंधी पर्चे भी वितरित किए और उन्हें दुकानों पर चस्पा करने के निर्देश दिए, ताकि ग्राहक भी प्रतिबंधित मांझे के नुकसान और कानूनी कार्रवाई से अवगत हो सकें।

दुकानों पर नहीं मिला तो आखिर कहां से पहुंच रहा चीनी मांझा?

राजघाट पुलिस की कार्रवाई के दौरान दुकानों पर प्रतिबंधित चीनी मांझा नहीं मिलने के बावजूद शहर में इसके इस्तेमाल से लोगों के घायल होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि प्रतिबंधित मांझा आखिर लोगों तक पहुंच कहां से रहा है।

स्थानीय स्तर पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और विभिन्न एप्लीकेशन के माध्यम से चीनी मांझे की बिक्री होने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में केवल दुकानों की जांच के साथ-साथ ऑनलाइन बिक्री, डिलीवरी नेटवर्क और सप्लाई करने वालों की भी निगरानी किए जाने की जरूरत है।

राजघाट पुलिस की ओर से रिकॉर्डेड संदेश, ड्रोन निगरानी, पैदल मार्च और पर्चों के जरिए चलाया गया जागरूकता अभियान निश्चित रूप से सराहनीय पहल है। हालांकि, प्रतिबंधित चीनी मांझे पर प्रभावी रोक के लिए उसकी सप्लाई लाइन तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती है। दुकानों पर मांझा नहीं मिलने के बावजूद यदि इसका इस्तेमाल जारी रहता है तो इसके स्रोत और आपूर्ति तंत्र की गहन जांच जरूरी हो जाती है।

पुलिस की इस कार्रवाई से जहां पतंग कारोबारियों में जागरूकता बढ़ी है, वहीं आम लोगों से भी अपील की गई है कि वे प्रतिबंधित चीनी मांझे का इस्तेमाल न करें और इसकी बिक्री की जानकारी पुलिस को देकर हादसों की रोकथाम में सहयोग करें।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ