ईद मिलाद-उन-नबी के जलसे में मिला अमन, भाईचारे और समाज सुधार का संदेश

  • न्यू चिलमापुर कॉलोनी में आयोजित कार्यक्रम में कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने रखी समाज की बेहतरी के लिए अहम बातें
गोरखपुर। न्यू चिलमापुर कॉलोनी में ईद मिलाद-उन-नबी के अवसर पर जलसा-ए-इस्लाह-ए-मुआशरा व ईद मिलाद-उन-नबी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। जलसे में समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा, अमन, इंसानियत और अच्छे आचरण को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत हाफिज आरिफ रजा की तिलावत से हुई। नात-ए-पाक सद्दाम खान व हाफिज आरिफ रजा ने पेश की। इसके बाद मुख्य वक्ता कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने समाज सुधार और पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद ﷺ के जीवन से मिलने वाली शिक्षाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि समाज की बेहतरी के लिए हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने कहा कि सुधार की शुरुआत बाहर से नहीं, बल्कि अपने घर और अपने व्यवहार से होनी चाहिए। जब व्यक्ति अपने आचरण को बेहतर बनाता है तो उसका सकारात्मक प्रभाव परिवार और फिर पूरे समाज पर पड़ता है।

उन्होंने लोगों से सच्चाई, ईमानदारी, इंसाफ, आपसी सम्मान और जरूरतमंदों की मदद को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पड़ोसी के अधिकारों का ध्यान रखना, बुजुर्गों का सम्मान करना और बच्चों के साथ प्यार एवं अच्छे संस्कार का व्यवहार करना एक बेहतर समाज की बुनियाद है।

तकरीर में मौजूदा दौर में युवाओं की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया। कहा गया कि युवा समाज की ताकत हैं। उन्हें शिक्षा, सकारात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ना जरूरी है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की पढ़ाई के साथ उनके चरित्र और व्यवहार पर भी ध्यान दें, ताकि नई पीढ़ी जिम्मेदार नागरिक के रूप में आगे बढ़ सके।

ईद मिलाद-उन-नबी के संदेश पर प्रकाश डालते हुए वक्ता ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद ﷺ का जीवन पूरी इंसानियत के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके जीवन से प्रेम, दया, क्षमा, सच्चाई, इंसाफ और अच्छे व्यवहार की सीख मिलती है। इन शिक्षाओं को अपने दैनिक जीवन में अपनाना ही ऐसे अवसरों की वास्तविक सार्थकता है।

जलसे में समाज में बढ़ती दूरी और आपसी मतभेदों को कम करने पर भी जोर दिया गया। वक्ता ने कहा कि छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद करने के बजाय लोगों को एक-दूसरे की गलतियों को माफ करने और मिल-जुलकर रहने की कोशिश करनी चाहिए। समाज में मजबूत रिश्ते और आपसी सहयोग ही खुशहाल माहौल तैयार कर सकते हैं।

कार्यक्रम में लोगों को नशे, बुरी संगत, फिजूलखर्ची और सामाजिक बुराइयों से दूर रहने की भी प्रेरणा दी गई। साथ ही जरूरतमंदों, गरीबों और कमजोर लोगों की सहायता करने तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का संदेश दिया गया।

जलसे में मौजूद लोगों ने वक्ताओं की बातों को गंभीरता से सुना। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर सकारात्मक माहौल बना रहा। आयोजकों ने कहा कि जलसे का उद्देश्य केवल एक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि लोगों को अपने जीवन और समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करना है। कार्यक्रम को सफल बनाने में इमरान उर्फ इमू भाई, खालिद, समीर रजा, अब्दुल अहद, सद्दाम, अतीकुर्रहमान, फैज अहमद, औसाफ अली, अल्यान रजा, मुजफ्फर हसनैन रूमी और शादाब सिद्दीकी सहित अन्य सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी ने आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग किया।आयोजकों ने कहा कि समाज में अमन और भाईचारा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से मिलने वाले संदेश को व्यवहार में उतारकर ही समाज को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने लोगों से आपसी मतभेद भुलाकर मोहब्बत और भाईचारे के साथ रहने की अपील की। कार्यक्रम के अंत में देश और समाज में अमन-शांति, खुशहाली, आपसी भाईचारे और तरक्की के लिए दुआ की गई। न्यू चिलमापुर कॉलोनी में आयोजित जलसा-ए-इस्लाह-ए-मुआशरा लोगों को धार्मिक संदेश के साथ समाज सुधार, इंसानियत और भाईचारे की प्रेरणा देकर संपन्न हुआ।


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