तोते की आज़ादी


 


एक व्यापारी के घर में एक बहुत सुंदर तोता रहता था। उसका पिंजरा सोने जैसा चमकता था। उसे अच्छा खाना मिलता और व्यापारी उससे बहुत प्यार करता था। फिर भी तोता अक्सर उदास रहता।

एक दिन व्यापारी ने यात्रा पर जाने की तैयारी की। उसने घर के लोगों से पूछा कि किसके लिए क्या लाना है। आखिर उसने अपने तोते से भी पूछा, “तुम्हारे लिए क्या लाऊँ?”

तोते ने कहा, “जिस जंगल में आज़ाद तोते रहते हैं, वहाँ जाना। उनसे कहना कि मैं एक पिंजरे में बंद हूँ और उनकी आज़ादी को याद करता हूँ।”

व्यापारी ने जंगल में जाकर आज़ाद तोतों को अपने पालतू तोते का संदेश सुनाया। तभी एक तोता अचानक पेड़ से गिर पड़ा और बिल्कुल शांत हो गया।

व्यापारी को यह देखकर बहुत दुख हुआ। घर लौटकर उसने अपने तोते को पूरी घटना सुनाई।

यह सुनते ही पिंजरे वाला तोता भी नीचे गिर पड़ा। व्यापारी ने समझा कि वह मर गया। उसने पिंजरा खोला और उसे बाहर निकालकर रख दिया।

जैसे ही व्यापारी दूसरी तरफ गया, तोता उड़कर पेड़ पर जा बैठा।

व्यापारी समझ गया कि आज़ाद तोते ने मरने का नाटक करके अपने साथी को संकेत दिया था कि आजादी पाने के लिए पुराने बंधन से बाहर निकलना होगा।

रूमी की शिक्षा में यह कहानी आत्मिक आज़ादी का प्रतीक है। इंसान भी कई बार अपने लालच, अहंकार और इच्छाओं के पिंजरे में बंद रहता है।

सीख: असली आज़ादी बाहर के पिंजरे से नहीं, अंदर के बंधनों से निकलने में है।

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