तक़्बीरे तशरीक़
गोरखपुर।
अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, लाइलाहा इल्लल्लाह। वल्लाहु अकबर,अल्लाहुु अकबर, व लिल्लाहिल हम्द।। पढ़ी जायेगी। नमाज ईदगाह में जाकर पढ़ना और रास्ता बदल कर आना, पैदल जाना और रास्ते में तकबीरे तशरीक पढ़ना सुन्नत हैं।
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू। मैं सैयद फ़रहान अहमद हूँ। इस ब्लॉग के माध्यम से इस्लामी जानकारी, सीरतुन्नबी ﷺ, कुरआन व हदीस की शिक्षाएँ, इतिहास, शिक्षा तथा सामाजिक विषयों पर प्रमाणिक और उपयोगी लेख साझा करता हूँ। हमारा उद्देश्य ज्ञान को सरल भाषा में अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना है।
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