गोरखपुर। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद ﷺ की पैदाइश के मुबारक मौके पर शहर के विभिन्न मोहल्लों में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी ﷺ की महफिलें आयोजित की गईं। इसी क्रम में तुर्कमानपुर, नौरंगाबाद और जमुनहिया बाग में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी ﷺ के कार्यक्रम आयोजित हुए। कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत कर पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की सीरत और उनकी शिक्षाओं को याद किया। नात-ओ-मनकबत और तकरीरों के जरिए मोहब्बत, भाईचारे, इंसानियत और समाज में अमन का पैगाम दिया गया।
नौरंगाबाद में आयोजित कार्यक्रम में देर रात तक नातिया कलाम पेश किए गए। नातख्वानों ने पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की शान में नातें पेश कर माहौल को रूहानी बना दिया। मौजूद लोगों ने अदब व एहतराम के साथ नातिया कलाम सुने और पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की जिंदगी के विभिन्न पहलुओं को याद किया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि ईद मिलादुन्नबी ﷺ केवल खुशी मनाने का अवसर नहीं, बल्कि पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की शिक्षाओं को अपनी जिंदगी में उतारने का संकल्प लेने का भी मौका है।
तुर्कमानपुर में मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ ने पूरी इंसानियत को मोहब्बत, रहम, इंसाफ, भाईचारे और सद्भाव का संदेश दिया। उन्होंने समाज के कमजोर, जरूरतमंद, गरीब और बेसहारा लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करने की शिक्षा दी। उनकी सीरत हमें बताती है कि किसी इंसान की महानता उसके धन या पद से नहीं, बल्कि उसके अच्छे अखलाक, व्यवहार और दूसरों के प्रति उसके रवैये से होती है।
जलसे में इस बात पर भी जोर दिया गया कि आज के दौर में पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की सीरत को समझना बेहद जरूरी है। परिवारों में बच्चों को उनकी जिंदगी और शिक्षाओं से परिचित कराया जाए। युवाओं को अच्छे चरित्र, अनुशासन, मेहनत और इंसानियत की राह पर चलने के लिए प्रेरित किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि समाज में नफरत और तनाव को बढ़ावा देने के बजाय आपसी भाईचारे और सौहार्द को मजबूत करने की जरूरत है।
जमुनहिया बाग में भी जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी ﷺ की महफिल का आयोजन किया गया। यहां लोगों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर कार्यक्रम में हिस्सा लिया। महफिल में नात, सलाम और तकरीर का सिलसिला चला। पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की पैदाइश, उनकी सीरत और उनके अखलाक पर रोशनी डाली गई। वक्ताओं ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की पूरी जिंदगी इंसानियत के लिए एक बेहतरीन मिसाल है। उन्होंने लोगों को सच्चाई, ईमानदारी, सब्र, माफी और जरूरतमंदों की मदद करने की शिक्षा दी।
कार्यक्रम में शामिल लोगों ने कहा कि ईद मिलादुन्नबी ﷺ के मौके पर मोहल्लों में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ समाज सेवा के कार्यों को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए। गरीबों और जरूरतमंदों की मदद, बीमारों की खैर-खबर, बुजुर्गों का सम्मान, बच्चों की बेहतर शिक्षा और समाज में स्वच्छता एवं भाईचारे को बढ़ावा देना पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की शिक्षाओं को अमल में लाने का बेहतर माध्यम हो सकता है।
वक्ताओं ने कहा कि मिलाद की महफिलों का उद्देश्य केवल आयोजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इन महफिलों से मिलने वाले संदेश को रोजमर्रा की जिंदगी में उतारना चाहिए। अगर इंसान पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की सीरत से सच्चाई, ईमानदारी, वादा निभाने, पड़ोसियों का ख्याल रखने और जरूरतमंदों की मदद करने की सीख हासिल कर ले तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
कार्यक्रम में बच्चों और युवाओं की भी मौजूदगी रही। वक्ताओं ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को अच्छी तालीम के साथ अच्छे संस्कार भी दें। उन्हें पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की सीरत और उनके बताए हुए उसूलों से परिचित कराएं, ताकि नई पीढ़ी बेहतर इंसान और जिम्मेदार नागरिक बन सके।
कार्यक्रम में हाफिज रहमत अली निजामी, मुजफ्फर हसनैन रूमी, हाफिज सैफ अली, हाफिज अशरफ रजा, सलीम, नेहाल अहमद, मौलाना अनवर अहमद तनवीरी, फरहान अत्तारी, वसील्लाह अत्तारी, सय्यद इब्राहिम अत्तारी, शहजाद अत्तारी, सय्यद शाबाज, सय्यद फराज, नूर मोहम्मद, रेहान, मोहम्मद सलीम, बेलाल अहमद, जीशान, अयान, मोहम्मद आलम, बदरुद्दीन, मोहम्मद जाहिद, तबरेज आलम, आसिफ महमूद, हस्सान, आसिफ़ अंसारी, अफ़सर अंसारी, शहबाज़ अहमद, साहिल, ज़ीशान, फरहान, मुनाजिर हसन और हादी सहित बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की।
महफिल के दौरान नात-ओ-मनकबत और सलाम पेश किया गया। पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की सीरत के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए लोगों को उनके बताए रास्ते पर चलने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने कहा कि ईद मिलादुन्नबी ﷺ का पैगाम मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम है। इसे समाज में अमन और भाईचारा कायम करने के संकल्प के साथ मनाया जाना चाहिए।
आयोजकों ने कार्यक्रम में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की शिक्षाओं से जोड़ने और समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने का प्रयास जारी रहेगा। कार्यक्रम के अंत में देश और समाज में अमन-चैन, खुशहाली और भाईचारे के लिए दुआ की गई।
तुर्कमानपुर, नौरंगाबाद और जमुनहिया बाग में आयोजित जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी ﷺ की महफिलों ने लोगों को पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की सीरत पर चलने और उनके बताए हुए मोहब्बत, इंसानियत, अमन और भाईचारे के संदेश को आम करने का संदेश दिया।





0 टिप्पणियाँ