*जब सुल्तान फिरोज शाह तुगलक आया गोरखपुर तो राजा ने दिया दो हाथी का तोहफा*


*इतिहास का पन्ना*
गोरखपुर। गोरखपुर-परिक्षेत्र का इतिहास खण्ड प्रथम में डा. दानपाल सिंह पेज नं. 36 व 37 पर लिखते हैं कि तुगलवंश के सुल्तान *फिरोजशाह तुगलक* बंगाल के सूबेदार शम्सुद्दीन इलियास शाह की बगावत दबाने के लिए एक बड़ी सेना लेकर (सन् 1353 ई.) सरयू के रास्ते से बंगाल गये। *फरिश्ता* के अनुसार इस यात्रा क्रम में सुल्तान फिरोजशाह तुगलक गोरखपुर आया। जहां स्थानीय राजाओं व जमींदारों ने उसका स्वागत किया। फिरोजशाह इनके स्वागत से खुश हुआ। अत: उसने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि यहां के किसी गांव तथा उसके निवासियों अथवा पशुओं को छति न पहुंचायें। उदयसिंह नामक राजा को मुकद्म की उपाधि दी गयी तथा उसने सुल्तान को दो हाथी और दूसरे तोहफे समर्पित किए। स्थानीय शासकों ने इलियास शाह के ऊपर आक्रमण में फिरोजशाह का साथ दिया। *बरनी* के अनुसार गोरखपुर का शासक ने अपने वर्षों का बकाया अपना  राजस्व अवध की सरकार में जमा किया। सतासी राज्य के एक बाबू चवरिया के गुरू प्रसाद सिंह श्रीनेत को वह अपने साथ बंगाल की लड़ाई पर भी ले गया।

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