40 साल बाद तरावीह की नमाज में हुआ एक कुरआन मुकम्मल

syed farhan ahmad
गोरखपुर। रमजानुल मुबारक का महीना चल रहा हैं। सभी फैजयाब हो रहे हैं। ऐसे पुरनूर माहे रमजान में गोरखपुर के हाफिज रज्जब अली ने एक नई मिसाल कायम की हैं। उन्होंने कुशीनगर के डोमरी गांव में 40 साल बाद तरावीह की नमाज में महज पांच दिनों में एक कुरआन शरीफ मुकम्मल कर दिया।
बतातें चलें कि मस्जिद हसनैन घासीकटरा के पेश इमाम हाफिज रज्जब अली ने अपनी मस्जिद में नौ रमजान को तरावीह में एक कुरआन शरीफ मुकम्मल किया। किसी ने उनसे कुशीनगर के डोमरी गांव का जिक्र कर दिया। फिर क्या था हाफिज रज्जब उस गांव में पहुंच गये और 10-14 रमजान में तरावीह की नमाज में  कुरआन शरीफ मुकम्मल कर दिया।
हाफिज रज्जब ने बताया कि गांव में पचास घर मुस्लिमों के हैं। सब गरीब परिवार हैं। गांव में छोटी सी मस्जिद हैं। पिछले चालीस सालों से यह तरावीह की नमाज में कुरआन शरीफ मुकम्मल नहीं हुआ। जब मैंने यह सुना तो जाकर तरावीह में एक कुरआन महज पांच दिन में मुकम्मल किया। लोगों में बहुत उत्साह था। हालांकि पांचों की नमाज व छोटी तरावीह उस मस्जिद में होती हैं। हाफिज रज्जब करीब पचीस साल से गोरखपुर में मस्जिद में इमामत कर रहे हैं।

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