गोरखपुर : कुरआन इंसानी जिंदगी का रहनुमा



रमजान महीने में पढ़ी जाने वाली विशेष नमाज तरावीह के दौरान एक कुरआन की तिलावत मुकम्मल होने पर रहमतनगर जामा मस्जिद में नमाजियों ने मुल्क के अमन, तरक्की व खुशहाली के लिए दुआएं कीं। इस दौरान इमाम मौलाना अली अहमद शाद बस्तवी ने कहा कि कुरआन कलामे इलाही है। इसका एक भी अक्षर न बदला है, न बदलेगा। कुरआन का पढ़ना, सुनना, देखना व छूना सभी कुछ इबादत है। दुनिया में कुरआन सिर्फ एक किताब नहीं बल्कि इंसानी जिंदगी का रहनुमा है। यहां हाफिज कुरबान अली ने कुरआन शरीफ मुकम्मल किया। इस मौके पर अली गजनफर शाह, अली मुजफ्फर शाह, अली अख्तर, मुश्ताक हसन, मारुफ, नासिर अली, अली मजहर शाह, साजिश कुरैशी, मुबारक अहमद सहित तमाम लोग मौजूद रहे 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

*गोरखपुर में डोमिनगढ़ सल्तनत थी जिसे राजा चंद्र सेन ने नेस्तोनाबूद किया*

इमामे आज़म अबू हनीफा नोमान बिन साबित रदियल्लाहु अन्हु की हालाते ज़िन्दगी : Imam e Azam Abu Hanifa

*गोरखपुर के दरवेशों ने रईसी में फकीरी की, शहर में है हजरत नक्को शाह, रेलवे लाइन वाले बाबा, हजरत कंकड़ शाह, हजरत तोता-मैना शाह की मजार*